मामले में अब कुछ नहीं बचा: न्यायालय ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा किया

मामले में अब कुछ नहीं बचा: न्यायालय ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा किया

मामले में अब कुछ नहीं बचा: न्यायालय ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा किया
Modified Date: March 23, 2026 / 02:08 pm IST
Published Date: March 23, 2026 2:08 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत, के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो द्वारा दायर याचिका का सोमवार को निपटारा कर दिया।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि केंद्र ने 14 मार्च को वांगचुक की हिरासत का आदेश रद्द कर दिया था। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में अब कुछ भी नहीं बचा।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से पूछा था कि क्या सरकार द्वारा वांगचुक की हिरासत पर पुनर्विचार किए जाने की कोई संभावना है, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए।

केंद्र ने 14 मार्च को बताया कि उसने लेह में हिंसक प्रदर्शनों के बाद वांगचुक की गिरफ्तारी के लगभग छह महीने बाद रासुका के तहत उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

लेह में हिंसक प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गयी थी।

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया। इन प्रदर्शनों में 22 पुलिसकर्मियों समेत 45 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा गोला शोभना

शोभना


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