स्नेह और अपनेपन पर आधारित रिश्तों से बनता है परिवार : भगवत

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स्नेह और अपनेपन पर आधारित रिश्तों से बनता है परिवार : भगवत

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 11:33 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 11:33 PM IST

गोरखपुर (उप्र) 16 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि परिवार स्नेह और अपनेपन पर आधारित रिश्तों से बनता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गोरखपुर मंडल ने अपने शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ सभागार में कुटुंब स्नेह मिलन का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में गोरखपुर की 20 शहरी इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ-साथ चौरी चौरा और ग्रामीण गोरखपुर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। जिला, नगर, मंडल और प्रांतीय पदाधिकारी, अतिथि कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि परिवार केवल एक पुरुष और एक महिला के एक छत के नीचे रहने से नहीं बनता।

उन्होंने कहा, “परिवार स्नेह और अपनेपन पर आधारित रिश्तों से बनता है। बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद परिवार में धीरे-धीरे लगाव के बंधन विकसित होने लगते हैं।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवार ही वह मूलभूत इकाई है जो अगली पीढ़ी को आकार देती है और समाज में रहने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करती है।

भागवत ने कहा कि भारत में परिवार की अवधारणा अनूठी है क्योंकि यह लेन-देन संबंधी रिश्तों के बजाय भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि “कई देशों में, रिश्ते अक्सर संविदात्मक प्रकृति के होते हैं। भारत में, एक बच्चा परिवार में जन्म लेता है और उसी में पलता-बढ़ता है, जबकि कुछ पश्चिमी समाजों में, व्यक्ति परिवार का हिस्सा बन जाते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कैसे लोगों ने अपील किए जाने पर स्वेच्छा से राष्ट्र के लिए सोना और कीमती वस्तुएं दान कीं, जो भारत में पारिवारिक और सामाजिक बंधनों की मजबूती को रेखांकित करता है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में, वैवाहिक संबंधों को छोड़कर, महिलाओं को परंपरागत रूप से मां के समान सम्मान दिया जाता है।

उन्होंने कहा, “हमारा दृष्टिकोण केवल वैचारिक नहीं है, यह आचरण में भी झलकना चाहिए, और इसकी शुरुआत घर से होती है। हमारी परंपरा में परिवार व्यक्ति से श्रेष्ठ है, जबकि पश्चिमी विचारधारा में व्यक्ति को परिवार से ऊपर माना जाता है। हम विवाह को एक कर्तव्य मानते हैं, अनुबंध नहीं।”

उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार सप्ताह में एक दिन सामूहिक चर्चा के लिए निर्धारित करें – बच्चों से लेकर बड़ों तक – ताकि आम सहमति बन सके और उसे व्यवहार में लाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हर दिन, हमें समाज के लिए कम से कम एक अच्छा काम करने के बारे में सोचना चाहिए और उसे करना चाहिए।

प्रांतीय आरएसएस प्रमुख डॉ. महेंद्र अग्रवाल और मंडल प्रमुख शेषनाथ भागवत के साथ मंच पर उपस्थित थे।

भाषा सं आनन्द मनीष रंजन

रंजन