रायपुरः Politics Heats UP On Naxal issue एक तरफ केंद्र सरकार ने नक्सलवाद प्रभावित जिलों की सूची जारी की है, जिसमें ये बताया गया कि अब केवल देश में सिर्फ 6 जिलों में ही नक्सलवाद बचा है। इसमें छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 4 जिले शामिल हैं। सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और गरियाबंद यानि अब इन्हीं जिलों से नक्सलवाद के सफाए पर फोकस होगा, लेकिन सियासी गलियारे में बहस है कि किस सरकार के वक्त नक्सलवाद के सफाए पर फोकस कम रहा? किसे नक्सली अपनी सरकार मानते हैं?
Politics Heats UP On Naxal issue प्रदेश के मुख्यमंत्री की पिछली कांग्रेस सरकार पर की गई इस दो टूक टिप्पणी पर सियासी घमासान बढ़ गया। CM विष्णुदेव साय ने पूर्व CM भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार बीते 5 साल नक्सलवाद के खिलाफ ठीक से लड़ी होती तो प्रदेश में नक्सलवाद नहीं बढ़ता। बयान पर कांग्रेसी नेताओं ने भी पूरी ताकत से पलटवार किया। दावा किया कि भूपेश सरकार वक्त हर मोर्चे पर लड़ी लड़ाई की वजह से ही नक्सलवाद सिमटा और प्रशासन अबूझमाड़ तक पहुंचा।
इसी के साथ कांग्रेस नेताओं ने पिछली रमन सरकार के दौरान हुई बड़ी नक्सल घटनाओं की याद दिलाई तो जवाब में बीजेपी सांसद ने नक्सलवाद को आंतरिक आतंकवाद बताते हुए, इसके सफाए में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को सराहा। वैसे हाल ही में LWE बैठक के लिए रायपुर पहुँचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी पिछली कांग्रेस सरकार को नक्सल के ख़िलाफ़ ठीक से काम ना करने वाली बात कह चुके हैं, जिसे अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है। सवाल ये कि क्या वाकई नक्सली पिछली सरकार को अपना मानते थे? या फिर ये आरोप-प्रत्यारोफ सिर्फ और सिर्फ क्रेडिट की होड़ हैं?
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