गुवाहाटी, 16 फरवरी (भाषा) असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने सोमवार को पार्टी इस्तीफा दे दिया, जिससे चुनावी मुहाने पर खड़े इस राज्य में नई राजनीतिक हलचल मच गई। हालांकि, मुख्य विपक्षी दल के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने त्यागपत्र पर पुनर्विचार का फैसला किया है।
वहीं, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बोरा को भाजपा में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से बातचीत के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। हालांकि, बोरा ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए आलाकमान से समय मांगा है।
सिंह ने बोरा के घर के बाहर पत्रकारों से कहा, “पार्टी नेतृत्व ने बोरा से इस मुद्दे पर चर्चा की है। राहुल गांधी ने भी उनसे 15 मिनट बात की। यह हमारा आंतरिक मामला है। उन्हें परेशान करने वाले मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और मैं उनका धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इस्तीफा वापस लेने पर सहमति दी।”
बोरा ने कहा, “मेरे पुराने सहयोगी और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लोग मेरे घर आए, मैं उनका सम्मान करता हूं। मैंने मंगलवार सुबह तक का समय मांगा है, ताकि मैं अपने परिवार से बात कर सकूं और इस संबंध में निर्णय ले सकूं।”
उन्होंने कहा, “यह फैसला अब केवल मेरा नहीं है। मुझे अपने परिवार, विशेषकर अपने भाइयों से चर्चा करनी है, जिनके व्यावसायिक हित मेरे कांग्रेस में रहने के कारण प्रभावित हुए हैं।”
उन्होंने कहा, “अपने भाइयों के साथ मैं सिंह से मिलूंगा और उन्हें अपना निर्णय (कल सुबह तक) बता दूंगा।”
इस्तीफे की खबर मिलते ही सिंह, कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई, कई अन्य वरिष्ठ नेता और विधायक बोरा के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे थे।
इससे पहले, बोरा ने पार्टी आलाकमान को अपना इस्तीफा भेजा था और पार्टी में खुद की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया था।
गोगोई ने कहा कि बोरा पार्टी के लिए “मजबूत स्तंभ” हैं और उन्होंने हमेशा राज्य में सक्रिय नकारात्मक ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई है।
उन्होंने कहा कि बोरा “सच्चे कांग्रेसी, साहसी नेता हैं, जिनके डीएनए में असमिया संस्कृति, सभ्यता और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की पार्टी विचारधारा गहराई से रची-बसी है।”
उन्होंने कहा, “यदि पार्टी के कुछ मुद्दों के कारण उन्हें ठेस पहुंची हो तो मैं एक छोटे भाई के रूप में उनसे माफी मांगता हूं।”
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गोगोई ने कहा, “यह हमारे लिए जटिल मामला है। हम भी एक-एक कदम सीख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में वे हमारा मार्गदर्शन करेंगे, ताकि न केवल कांग्रेस, बल्कि विपक्ष मजबूत हो।”
बोरा ने इससे पहले खरगे को भेजे अपने इस्तीफे में आरोप लगाया था कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें “नजरअंदाज” किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका उचित सम्मान नहीं मिल रहा है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि भाजपा के दरवाजे बोरा के लिए खुले हैं और यदि वह पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें “सुरक्षित सीट” से चुनाव जिताने में मदद की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि बोरा कांग्रेस के “आखिरी हिंदू नेता” हैं, जिनकी पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।
उन्होंने कहा, “उनका इस्तीफा यह प्रतीकात्मक संदेश देता है कि कांग्रेस में सामान्य परिवार से आने वाला कोई व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता। कांग्रेस साधारण परिवारों के लोगों को पहचान नहीं देती, लेकिन मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आता हूं और भाजपा ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया। हम वंशवादी राजनीति के खिलाफ हैं।”
शर्मा ने कहा कि वह कल शाम बोरा के आवास पर जाकर उनके भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा, “अब तक बोरा ने मुझसे या भाजपा से संपर्क नहीं किया है और फिलहाल हम प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपर्क में नहीं हैं। यदि वह भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, तो हम उनका स्वागत करेंगे, और यदि नहीं भी चाहते, तो हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।”
बोरा 2021 से 2025 तक कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष रहे और पिछले वर्ष उनकी जगह गौरव गोगोई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं।
असम में इस साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव संभावित है।
भाषा हक अविनाश दिलीप
दिलीप