तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एमके राघवन ने शुक्रवार को दावा किया कि हाल में संपन्न केरल विधानसभा चुनावों में सांसदों के चुनाव न लड़ने का कारण पार्टी के कुछ नेताओं की “हठधर्मिता” थी और यह आला कमान का निर्णय नहीं था।
राघवन ने कहा कि पार्टी के किसी व्यक्ति ने उनसे एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए संपर्क किया था, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं की इस “हठधर्मिता” की वजह से मामला छोड़ दिया गया कि सांसदों को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।
उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह निर्णय किसी भी पार्टी समिति या सम्मेलन या मंच में नहीं लिया गया था कि किसी भी संसद सदस्य को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।
कोझिकोड लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राघवन ने कहा कि केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ का यह कहना गलत है कि सांसदों को चुनाव लड़ने की अनुमति न देना पार्टी आला कमान का निर्णय था।
राघवन ने कहा, “इसके लिए आला कमान को दोष देना गलत है। पार्टी के भीतर किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए उन्होंने बाद में ऐसा निर्णय लिया। केरल में कुछ पार्टी नेताओं की हठधर्मिता के कारण यह निर्णय लेना पड़ा।”
उन्होंने केरल में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं की भी निंदा की और कहा कि इससे कांग्रेस की छवि धूमिल होगी।
राघवन ने कहा कि चर्चा एर्नाकुलम जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष मोहम्मद शियास की टिप्पणी से शुरू हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि शियास को इस तरह की टिप्पणी करने का क्या अधिकार है।
राघवन ने कहा, “उनके (शियास) बयान ने ही सारा विवाद खड़ा किया। एक ऐसा बयान जो नहीं दिया जाना चाहिए था। फिर यह विवाद साइबर जगत में तेजी से फैलने लगा।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शियास के बयान विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशान की जानकारी में दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाएं परिणाम घोषित होने के बाद ही होनी चाहिए।
केरल में 140 विधानसभा सीटों के चुनाव के लिए मतदान नौ अप्रैल को हुआ था, जबकि नतीजे चार मई को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे।
भाषा प्रशांत पारुल
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