धराली आपदा के एक साल : जिंदगी पटरी पर लौटी, लेकिन पुनर्वास का इंतजार जारी

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धराली आपदा के एक साल : जिंदगी पटरी पर लौटी, लेकिन पुनर्वास का इंतजार जारी

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 05:31 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 05:31 PM IST

उत्तरकाशी/देहरादून, पांच अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में पिछले साल बादल फटने और मूसलाधार बारिश के बाद खीर गंगा और भागीरथी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी को बुधवार को एक साल पूरा हो गया।

इस भीषण आपदा ने कुछ ही पलों में पूरे धराली बाजार, कई होटल-रेस्तरां, होमस्टे और मकानों को जमींदोज कर दिया। इलाके की रौनक और चहल-पहल अचानक 50 से 60 फीट मलबे के नीचे दबकर खामोश हो गई। कई लोग गुम हो गए, जबकि सैकड़ों अन्य ने अपने आशियाने और वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई आजीविका को खो दिया।

आधिकारियों के मुताबिक, आपदा में चार लोगों के शव बरामद हुए, जबकि 52 अन्य लोग लापता हो गए।

हालांकि, एक साल बाद धराली, हर्षिल और उसके आसपास के इलाकों में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। बाजार फिर से आबाद होने लगे हैं और पर्यटन गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ रही हैं। लेकिन कई परिवारों को अब भी राहत और मदद के मरहम का इंतजार है।

आपदा से उबरकर दोबारा खड़े होने के प्रयास में लोगों के साहस के साथ-साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार, जिला प्रशासन और राहत एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक साल में क्षेत्र के विकास, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उनकी सहायता के ऊपर 33 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि आपदा से प्रभावित 115 परिवारों का पुनर्वास किया जाना था, जिनमें से 87 परिवारों का पुनर्वास पूरा हो चुका है, जबकि 15 परिवारों के लिए चयनित निजी भूमि का भू-सर्वेक्षण किया जा रहा है।

गुसाईं ने कहा कि उन 13 परिवारों के लिए भी समाधान ढूंढा जा रहा है, जिनकी अपनी भूमि रहने योग्य नहीं बची है और उस पर लगातार खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने अभी तक प्रशासन से पुनर्वास की धनराशि भी स्वीकार नहीं की है।

इसके अलावा, गांव में एक परिवार ऐसा भी है, जिसके पास मकान बनाने के लिए अपनी कोई भूमि नहीं है और वह फिलहाल एक रिश्तेदार के घर में रहने को मजबूर है।

सबसे बड़ी समस्या उन 29 लोगों के सामने है, जिनके होटल और अन्य व्यवसाय सरकारी भूमि पर थे। ऐसे लोगों को नियमित पुनर्वास के बजाय रीप परियोजना के तहत तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

गुसाईं ने बताया कि मृतक आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के अनुरूप चार-चार लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये प्रति परिवार दिए गए।

उन्होंने बताया कि लापता 52 व्यक्तियों में से 19 को मृत घोषित कर उनके आश्रितों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।

गुसाईं के अनुसार, आपदा में घायल 18 लोगों को निर्धारित मानकों के तहत सहायता दी गई। उन्होंने बताया कि पूरी तरह क्षतिग्रस्त 115 रिहायशी मकानों के मालिकों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है।

गुसाईं के मुताबिक, जिन 115 परिवारों का पुनर्वास किया जाना है, उन्हें छह महीने तक चार हजार रुपये प्रतिमाह की दर से 24 हजार रुपये प्रति परिवार किराया राशि दी गई।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस त्रासदी से वास्तविक रूप से उबरना तभी संभव होगा, जब हर प्रभावित परिवार का सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित हो जाएगा।

उत्तरकाशी होटल एसोसिएशन के सदस्य और प्रभावित लोगों में से एक महेश पंवार ने कहा कि उनके परिवार के पुनर्वास की कार्यवाही अभी शुरू भी नहीं हो पाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही उन लोगों का भी पुनर्वास होगा।

भाषा

सं दीप्ति पारुल

पारुल