नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने मणिपुर में विधानसभा चुनाव यथाशीघ्र कराने और निर्वाचित सरकार के गठन की मांग की।
विपक्ष के सदस्यों ने यह मांग मणिपुर से संबंधित एक संकल्प पर चर्चा के दौरान की। यह संकल्प जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को मणिपुर में भी लागू किए जाने से संबंधित है। मणिपुर में इस समय राष्ट्रपति शासन है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने उच्च सदन में यह प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण दोनों सदनों को केंद्रीय कानून पर संकल्प पारित करने की जरूरत है।
संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य सुष्मिता देव ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन जारी रहने की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘हम आज जो कर रहे हैं, वह मणिपुर की विधानसभा को करना था। हमें यह क्यों करना पड़ रहा है? क्योंकि मणिपुर राज्य में, निलंबित विधानसभा है, वहां राष्ट्रपति शासन है। 2024 के इस संशोधन का क्या मकसद है? वे व्यापार और जीवन में सुगमता की बात करते हैं। इनमें से कौन सी चीज आज मणिपुर में है, और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे राज्य में जहां लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं, और विस्थापित लोग राजभवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, हम जल प्रदूषण कानून संशोधन लाकर और यह कहकर उनका मजाक उड़ा रहे हैं कि हम मणिपुर की मदद कर रहे हैं।’’
तृणमूल सदस्य ने कहा, ‘‘अगर आप मणिपुर की मदद करना चाहते हैं, तो आपको तुरंत वहां लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने चाहिए।’’
कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने कहा कि यह संकल्प संसद में पेश करना पड़ा क्योंकि मणिपुर में हालात सुधरे नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर में कानून व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो गयी है, यह मुख्यमंत्री के नियंत्रण से बाहर हो गया, केंद्र ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी वहां गए और लोगों से मिले। प्रधानमंत्री को वहां जाना चाहिए था, लेकिन दो साल से अधिक समय तक वह मणिपुर नहीं गए।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हाल ही में, सितंबर 2025 में वह (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) मणिपुर गए… वह वहां वोट के लिए गए।’’
द्रमुक सदस्य पी विल्सन ने कहा, ‘‘राज्य की विधानसभा कब तक निलंबित रहेगी और संसद इस संकल्प को पारित करने सहित विधानसभा की जिम्मेदारी निभाएगी?’’
भाजपा सदस्य संजाओबा लीशेम्बा ने संकल्प का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में संविधान का अनुच्छेद 356 लागू है और राज्य विधानसभा की शक्तियों का इस्तेमाल संसद द्वारा किया जाएगा।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अयोध्या रामी रेड्डी अला ने कहा कि भूजल सुरक्षा संबंधी प्रावधान इसमें होना चाहिए। ‘‘औद्योगिक प्रदूषण जल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है और औद्योगिक इकाइयों में जल शोधन संयंत्र की स्थापना अनिवार्य की जानी चाहिए।’’
बीजद की सुलता देव ने कहा कि बड़ी बात यह है कि किसी न किसी बहाने मणिपुर की चर्चा तो सदन में हो रही है। उन्होंने कहा कि मणिपुर समय की दौड़ में पिछड़ रहा है, सबसे पहले इस ओर ध्यान देना चाहिए।
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि जल प्रदूषण का सामना पंजाब भी कर रहा है और राज्य की पवित्र नदियां सतलुज, घग्घर आदि प्रदूषित हो रही हैं जिसका कारण नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट प्रवाहित होना है। ‘‘आज पंजाब न्याय चाहता है। पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हो सकता है तो आज देश को पंजाब के साथ खड़ा होना चाहिए।’’
चर्चा में तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा, भाजपा के लहर सिंह सिरोया ने भी हिस्सा लिया।
जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 में जल प्रदूषण से जुड़े छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, केंद्र को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की सेवा शर्तें तय करने में मदद करने और कुछ श्रेणी के औद्योगिक संयंत्रों को कानूनी पाबंदियों से छूट देने के प्रावधान हैं।
भाषा अविनाश मनीषा अविनाश मनीषा
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