तिरूवनंतपुरम, 22 जून (भाषा) केरल में संक्रामक रोगों के फैलने की चिंताओं के बीच स्वास्थ्य विभाग के कामकाज को लेकर सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के बीच सोमवार को राज्य विधानसभा में तीखी बहस हुई तथा विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव की अपनी मांग खारिज होने के बाद सदन से बहिर्गमन किया।
कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस माकपा विधायक और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास ने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में गिरावट के संकेत दिख रहे हैं।
चर्चा की शुरुआत करते हुए रियास ने कहा, ‘‘किसी सरकार का पूरी तरह से आकलन करने के लिए 35 दिन शायद काफी न हों, लेकिन प्रशासन किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, यह समझने के लिए इतना समय पर्याप्त है।’’
रियास ने कहा कि राज्य में निपाह, ‘वेस्ट नाइल बुखार’, ‘अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस’ और ‘मंकी फीवर’ जैसे रोगों के मामले सामने आए हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि स्थिति से निपटने के लिए उसने स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल नहीं बिठाया।
मंत्री की इस बात का जिक्र करते हुए कि केरल में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, रियास ने कहा कि उन्हें लगता है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जल्द ही राज्य में इस रोग के मामले सामने आने की भी घोषणा कर सकते हैं।
रियास ने स्वास्थ्य विभाग में जारी स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे इस क्षेत्र के कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है।
विपक्षी सदस्य ने आरोप लगाया कि चार जिलों में जिला चिकित्सा अधिकारी नहीं हैं और कहा कि कोझिकोड, जहां निपाह का मामला सामने आया था, वहां वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की भारी कमी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि निपाह के इलाज के लिए जरूरी दवाइयां राज्य में रोग का पता चलने के कुछ दिनों बाद और विपक्ष के विरोध के बाद ही पहुंचीं।
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार के उस आरोप को खारिज कर दिया कि पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार मानसून से पहले की जरूरी सफाई और तैयारी के उपाय करने में नाकाम रही थी।
उन्होंने कहा कि मार्च और अप्रैल के महीनों को छोड़कर, जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए गए थे।
विजयन ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग का कामकाज पटरी से उतर गया है और जमीनी स्तर पर रोग के रोकथाम की गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रहे तबादलों से स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल गिर रहा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
आरोपों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि सरकार मुख्य रूप से ‘‘पांच साल के गलत फैसलों और दस साल के दिखावे’’ के नतीजों से निपट रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में निपाह का सिर्फ एक मामला सामने आया है और बताया कि भारत में कहीं भी इबोला के किसी मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री ने कहा कि संक्रामक रोगों के फैलने को लेकर दहशत में आने जैसी कोई स्थिति नहीं है और न ही स्थगन प्रस्ताव की कोई जरूरत है तथा उन्होंने सदन से कार्य स्थगन नोटिस को खारिज करने का आग्रह किया।
इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके विरोध में एलडीएफ सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
भाषा सुभाष नरेश
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