कामकोटि पर ‘गौ मूत्र विशेषज्ञ’ टिप्पणी को लेकर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रियंका को लिखा पत्र

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कामकोटि पर ‘गौ मूत्र विशेषज्ञ’ टिप्पणी को लेकर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रियंका को लिखा पत्र

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 09:04 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 09:04 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा को दो सौ से अधिक शिक्षाविदों ने एक खुला पत्र लिखकर आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को निशाना बनाते हुए की गई उनकी ‘गौ मूत्र विशेषज्ञ’ वाली टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 215 शिक्षाविदों के अनुसार किसी मुद्दे पर तर्कपूर्ण संवाद की जगह उपहास को नहीं अपनाया जा सकता। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कुलपति, उपकुलपति, पूर्व उपकुलपति तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के निदेशक शामिल हैं।

पत्र में कहा गया, ‘‘आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ बताए जाने संबंधी आपकी टिप्पणी पर निराशा व्यक्त करने के लिए हम यह पत्र लिख रहे हैं। चाहे यह व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर, इस तरह का वर्णन चिंताएं पैदा करता है। प्रोफेसर कामकोटि भारत के प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख हैं।’’

पत्र में कहा गया, ‘‘हर शिक्षाविद की तरह उन्हें भी परिकल्पनाएं पेश करने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक संवाद में भाग लेने का अधिकार है।’’

पत्र में कहा गया, ‘‘किसी विद्वान के विचारों के सार पर चर्चा करने के बजाय केवल एक ठप्पा लगाकर उसे खारिज करना उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर करने का खतरा पैदा करता है, जिसे विकसित करना संविधान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताता है।’’

पत्र में कहा गया, ‘‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मतलब केवल असामान्य विचारों के प्रति संदेह रखना नहीं है, बल्कि किसी दावे को स्वीकार करने या खारिज करने से पहले उसका निष्पक्ष रूप से परीक्षण करने की इच्छाशक्ति भी है।’’

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी, नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजीव कुमार, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) के निदेशक गणेशन कन्नाबिरन, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष डी. पी. अग्रवाल और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के पूर्व अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे सहित कई प्रमुख शिक्षाविद शामिल हैं।

पद्म पुरस्कार से सम्मानित कामकोटि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित छह-सदस्यीय परीक्षा सुधार कार्यबल के सदस्य हैं।

मंगलवार को लोकसभा में प्रियंका गांधी ने कहा था, ‘‘उन्हें (प्रधानमंत्री को) यह समझने की जरूरत है कि केवल नयी समितियां गठित करने से काम नहीं चलेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक राधाकृष्णन समिति की एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई है। वहीं, नयी समिति में एक पूर्व आईबी (गुप्तचर ब्यूरो) प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र’ विशेषज्ञ को भी शामिल किया गया है।’’

कामकोटि की शैक्षणिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए शिक्षाविदों ने कहा कि इतिहास बताता है कि जिन कई विचारों को कभी अविश्वसनीय माना गया था, उन्हें बाद में वैज्ञानिक मान्यता मिली, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार किए गए विश्वास समय के साथ खारिज भी कर दिए गए।

पत्र में कहा गया, ‘‘चिंता की बात यह भी है कि ऐसी टिप्पणियां भारत के शैक्षणिक और शोध समुदाय को क्या संदेश देती हैं। हमारे वैज्ञानिकों, विद्वानों और शिक्षकों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे सार्वजनिक विमर्श में बिना किसी अपमानजनक ठप्पे के डर के भाग ले सकते हैं। उनके तर्कों की आलोचना कीजिए, उनके साक्ष्यों को चुनौती दीजिए, उनसे अधिक ठोस प्रमाण की मांग कीजिए, लेकिन विद्वता और अकादमिक परंपरा को ही कमतर मत आंकिए।’’

कामकोटि जनवरी 2025 में चेन्नई स्थित एक गौशाला में पोंगल समारोह के दौरान दिए गए अपने भाषण को लेकर विवादों में आ गए थे। अपने संबोधन में उन्होंने एक संन्यासी की कहानी सुनाई थी, जिसके बारे में उनका दावा था कि गौ मूत्र पीने के बाद वह तेज बुखार से ठीक हो गया था। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई वैज्ञानिकों, नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसकी आलोचना की थी।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश