पीएफ में ढाई लाख से ज्यादा जमा टैक्स फ्री? इस मांग पर वित्त मंत्री ने किया ये बदलाव.. जानिए

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पीएफ में ढाई लाख से ज्यादा जमा टैक्स फ्री? इस मांग पर वित्त मंत्री ने किया ये बदलाव.. जानिए

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  • Publish Date - March 24, 2021 / 09:52 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:58 PM IST

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भविष्य निधि पीएफ पर ब्याज को कर मुक्त रखने के संबंध में कर्मचारी के अधिकतम वार्षिक योगदान की सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। यह उन मामलों में लागू होगा, जहां रिटायरमेंट फंड में एंप्लॉयर की ओर से कोई योगदान नहीं किया जाता है।

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वित्त वर्ष 2022 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि 2.5 लाख रुपये सालाना से ज्यादा के कर्मचारी के प्रोविडेंट फंड में योगदान पर ब्याज पर 1 अप्रैल 2021 से टैक्स लगेगा। वित्त विधेयक 2021 में अपने संशोधनों में इस सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। यह 1 अप्रैल, 2021 से शुरू होने वाले सभी योगदानों पर लागू होगा। कर्मचारी भविष्य निधि कोष संगठन (ईपीएफओ) में करीब छह करोड़ अंशधारक हैं।

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लोकसभा में फाइनेंस बिल 2021 पर चर्चा का जवाब देते हुए, सीतारमण ने उन मामलों में सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का एलान किया था, जहां एंप्लॉयर प्रोविडेंट फंड में योगदान नहीं करते हैं। वित्त मंत्री ने कहा, ”मेरी मंशा इस सीमा को केवल ऐसे पीएफ योगदान में बढ़ाने की है जहां कोष में नियोक्ता का योगदान नहीं है। 2021-22 के लिए टैक्स प्रस्तावों को प्रभावी करने वाला फाइनेंस बिल ध्वनिमत से पारित हुआ।

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यदि कोई व्यक्ति एक वर्ष में 12 लाख रुपये का योगदान देता है, तो कर 7 लाख रुपये (12 लाख -Rs 5 लाख) की ब्याज आय पर लागू होगा। जबकि 7 लाख रुपये की ब्याज आय 59,500 रुपये (ईपीएफ ब्याज दर 8.5 प्रतिशत) होगी, उसी पर देय कर 18,450 रुपये (सीमांत कर दर 30 प्रतिशत) होगा।

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इन कर्मचारियों को होगा फायदा- इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का एक महीने में कर्मचारी भविष्य निधि में अपना योगदान 41,666 रुपये (एक साल में 5 लाख रुपये) तक है, तो उसे ब्याज आय पर कोई कर नहीं लगेगा। हालांकि, यदि योगदान इससे अधिक है, तो अतिरिक्त योगदान की ब्याज आय पर कर लगेगा। इसका मतलब है कि 3,47,216 रुपये से अधिक मासिक मूल वेतन पाने वाले व्यक्ति अब इस कदम से प्रभावित होंगे क्योंकि उनका वार्षिक ईपीएफ योगदान (मूल वेतन के 12 प्रतिशत की दर से) 5 लाख रुपये से अधिक होगा।