नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि 2022-23 से 2024-25 की अवधि के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा विभागों तथा एफएसएसएआई के क्षेत्रीय कार्यालयों ने 5.18 लाख से अधिक खाद्य नमूनों की जांच की।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि इस अवधि में 88,192 मामलों का निपटारा जुर्माने के साथ किया गया, जबकि 3,614 मामलों में दोषसिद्धि हुई और 1,161 लाइसेंस रद्द किए गए।
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच के लिए वर्ष भर दूध, घी, मसाले, शहद और पनीर सहित विभिन्न खाद्य उत्पादों की निगरानी, निरीक्षण और यादृच्छिक नमूना जांच की जाती है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (आरबीआईएस) विकसित की है, जिसमें खाद्य कारोबार संबंधी जोखिम के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति तय की जाती है और इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
जाधव ने बताया कि उच्च जोखिम वाली सभी खाद्य श्रेणियों के लिए वार्षिक निरीक्षण अनिवार्य है और 2022-23 से 2024-25 के दौरान जोखिम आधारित कुल 56,259 निरीक्षण किए गए।
देश में खाद्य सुरक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए एफएसएसएआई राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है। इसमें लाइसेंसिंग और पंजीकरण, निरीक्षण एवं ऑडिट, नमूना परीक्षण, उपभोक्ता शिकायत निवारण और खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है।
खाद्य नियामक तंत्र को मजबूत करने के लिए एफएसएसएआई ने 252 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं को अधिसूचित किया है और अपीलीय नमूनों के विश्लेषण के लिए 24 संदर्भ प्रयोगशालाएं निर्धारित की हैं।
इसके अलावा, एफएसएसएआई ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ (एफएसडब्ल्यू) के रूप में मोबाइल प्रयोगशालाओं के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराई है, जो मौके पर ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने में सक्षम हैं।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 एफएसडब्ल्यू की सुविधा है।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश