हैदराबाद, एक सितंबर (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार द्वारा बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र में, चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद सहित अन्य मुद्दों पर बहस की मांग की तथा ‘एक देश-एक चुनाव’ पर कोई भी विधेयक लाए जाने को असंवैधानिक बताया है।
उन्होंने मांग की कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार चीन पर व्यापक बहस कराए।
ओवैसी ने यहां बृहस्पतिवार रात संवाददाताओं से कहा, ”चीन ने हमारी 2,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर रखा है। हमने पहले ही विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग की थी। हमें उम्मीद है और हमारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग है कि विशेष सत्र में चीन पर व्यापक बहस होगी। हमने देपसांग और डेमचोक में जमीन खो दी है।”
उन्होंने दावा किया, ”हम सीमा पर 25 गश्त बिंदुओं पर गश्त नहीं लगा पा रहे हैं।”
ओवैसी ने मांग की कि विशेष सत्र में, आरक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग की उप श्रेणियों संबंधी रोहिणी आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर आ रही खबरों को लेकर उन्होंने दावा किया है कि यह ‘असंभव’ है।
ओवैसी ने कहा, ”अगर ऐसा कोई विधेयक आता है तो यह असंवैधानिक होगा। संविधान की मूल संरचना का संघवाद एक हिस्सा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है। विधानसभाएं इसे पारित नहीं करेंगी। कोई भी गैर भाजपा शासित राज्य इसे स्वीकार नहीं करेगा।”
उन्होंने कहा कि सरकार को संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की भी घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि शीतकालीन सत्र न हो और सीधे फरवरी, 2024 में लेखानुदान पेश कर दिया जाए।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों और नीरज चोपड़ा को उनकी हाल में अर्जित शानदार उपलब्धियों के लिए संसद में सम्मानित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्व कप में भाग लेने जा रही राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को भी शुभकामनाएं देने के लिए संसद में आमंत्रित किया जाना चाहिए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि विशेष सत्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार आगामी जी-20 बैठक को लेकर खूब दिखावा करना चाहेगी।
सरकार ने बृहस्पतिवार को 18 से 22 सितंबर के बीच पांच दिनों के लिए संसद का ‘विशेष सत्र’ बुलाने की घोषणा की है लेकिन इसके एजेंडे के बारे में कुछ नहीं कहा है जिसके चलते कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
भाषा अभिषेक मनीषा
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