पंजाब विश्वविद्यालय की विरासत फर्नीचर वस्तुओं की नीलामी रोकने, जांच का आग्रह
पंजाब विश्वविद्यालय की विरासत फर्नीचर वस्तुओं की नीलामी रोकने, जांच का आग्रह
चंडीगढ़, 11 अगस्त (भाषा) चंडीगढ़ स्थित ‘हेरिटेज आइटम्स प्रोटेक्शन सेल’ के सदस्य एक अधिवक्ता ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सी पी राधाकृष्णन से 13 अगस्त को शिकागो में पंजाब विश्वविद्यालय की दो विरासत फर्नीचर वस्तुओं की प्रस्तावित नीलामी में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति को दिए गए एक अभ्यावेदन में अधिवक्ता अजय जग्गा ने दावा किया कि पंजाब विश्वविद्यालय से संबंधित दो वस्तुओं को शिकागो की एक नीलामी संस्था ने बिक्री के लिए सूचीबद्ध किया है। उन्होंने नीलामी पर तत्काल रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
अभ्यावेदन के अनुसार, लॉट नंबर 155 में आठ डाइनिंग कुर्सियों का एक सेट शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 12,000 से 15,000 अमेरिकी डॉलर है। नीलामी संस्था ने इन्हें पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रावास की कुर्सियां बताया है।
लॉट नंबर 161 को पंजाब विश्वविद्यालय की लेखन कुर्सी के रूप में बताया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 3,000 से 4,000 अमेरिकी डॉलर है।
जग्गा ने कहा कि दोनों लॉट की कुल अनुमानित कीमत 13,000 से 19,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 12.40 लाख रुपये से 18.12 लाख रुपये) है।
उन्होंने विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों से प्रस्तावित नीलामी पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने तथा यह पता लगाने के लिए अमेरिका में भारतीय राजनयिकों की सहायता लेने का अनुरोध किया कि ये वस्तुएं शिकागो कैसे पहुंचीं।
अधिवक्ता ने भारत की विरासत के संरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय की अपनी ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा करना नैतिक और संस्थागत जिम्मेदारी है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51ए(एफ) का हवाला दिया, जो नागरिकों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महत्व देने और उसका संरक्षण करने का आह्वान करता है। उन्होंने अनुच्छेद 49 का भी उल्लेख किया, जो राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं के संरक्षण से संबंधित है।
उन्होंने यह जांच कराने का भी अनुरोध किया है कि दोनों वस्तुएं नीलामी संस्था के पास कैसे पहुंचीं और क्या उन्हें कानूनी रूप से भारत से बाहर ले जाया गया था। अभ्यावेदन में यह भी जांच कराने का भी अनुरोध किया गया कि क्या इन वस्तुओं की बिक्री कानूनी रूप से हुई थी।
जग्गा ने उपराष्ट्रपति, विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जांच के आदेश देने का आग्रह किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन वस्तुओं को किसने बेचा या हटाया, वे भारत से कब बाहर ले जाई गईं और क्या इस दौरान किसी कानून या सरकारी आदेश का उल्लंघन हुआ।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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