संसद ने दी प्रश्नपत्र लीक निरोधक विधेयक को मंजूरी, विपक्ष का वाक आउट

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संसद ने दी प्रश्नपत्र लीक निरोधक विधेयक को मंजूरी, विपक्ष का वाक आउट

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 10:29 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी और इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी जिसमें प्रश्न पत्र लीक करने के अपराध में दस साल तक की सजा तथा 50 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

नीट प्रश्नपत्र लीक की पृष्ठभूमि में लाए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को लोकसभा ने एक दिन पहले ही मंजूरी दी थी।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। सदन ने विपक्ष द्वारा विधेयक पर लाये गये संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

मंत्री के जवाब के पहले कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए सदन से वाक आउट किया।

वाक आउट पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष पूरी तरह से मुद्दाविहीन हो गया है और उसने अपनी करतूत से इसे साबित भी कर दिया है।

चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ पेपर लीक से नहीं जुड़ा हुआ है बल्कि परीक्षा में कदाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ एनटीए ही नहीं, बल्कि यूपीएससी, रेलवे, बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी परीक्षाओं को भी कवर करता है।

उन्होंने छात्रों से जुड़े विषयों का जिक्र करते हुए कहा कि यह ऐसा मुद्दा है जो हर भारतीय नागरिक को प्रभावित करता है, यह विषय देश के हर परिवार, हर अभिभावक से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस विकसित ‘‘भारत 2047’’ का जिक्र करते हैं, उसके लिए ये युवा और छात्र बहुत बड़े निवेश हैं।

उन्होंने चर्चा में विभिन्न विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश किए गए आंकड़ों की सत्यता को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि चर्चा में जिक्र किया गया कि प्रश्नपत्र लीक के 152 मामले सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि ये आंकड़े कहां से मिले, यह बताना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चर्चा में कहा गया कि भारत में प्रभावित बच्चों की संख्या करोड़ो में बतायी गयी जो अवास्तविक है।

सिंह ने शिक्षा में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लायी गयी नयी शिक्षा नीति से स्थिति में व्यापक बदलाव आया और बच्चों को अपना पसंदीदा विषय चुनने की व्यापक आजादी मिली।

उन्होंने कहा कि पहले छात्रों को विषयों के चुनाव में सीमित विकल्प मिलते थे और स्थिति में बदलाव बहुत पहले किया जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा को वहनीय बनाने पर जोर दिया और ‘‘मैनेजमेंट कोटा’’ व्यवस्था को खत्म किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीटों में वृद्धि करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने न सिर्फ मेडिकल शिक्षा में बल्कि उच्च शिक्षा पर जोर दिया है और विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने लंबित रिक्तियों और प्रोन्नति का भी जिक्र किया और कहा कि बड़े पैमाने पर कर्मियों को प्रोन्नति दी गयी।

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों के अनुसार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।

इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।

विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी।

भाषा अविनाश माधव

अविनाश

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