संसद में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक पारित

संसद में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक पारित

संसद में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक पारित
Modified Date: August 10, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: August 10, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) संसद ने सोमवार को ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया जिसका मकसद ‘‘विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता’’ उपलब्ध कराकर अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

राज्य सभा ने कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष खासकर वाम दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘इस देश में वाम दलों को साहस नहीं है और वे तथ्यों का सामना नहीं कर सकते। वे सिर्फ भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं। वे सिर्फ अपना पक्ष रखने की कोशिश करते हैं तथा जवाब सुनना नहीं चाहते…।’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक में यूपीआई लेनदेन करने वाले पर कर लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यूपीआई पहले की तरह ही छोटे दुकानदारों के लिए, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मुफ्त होगा और कोई शुल्क नहीं लगेगा।

सदन ने इस संबंध में जून में लागू अध्यादेश को अस्वीकृत करने के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद जॉन ब्रिटास के सांविधिक संकल्प को खारिज कर दिया।

विधेयक पर चर्चा एवं पारित किए जाने के समय कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्य मौजूद नहीं थे क्योंकि वे इससे पहले ही सदन से वॉक आउट कर गये थे।

विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान सदस्यों ने जहां इस विधेयक के प्रावधानों से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलने और हीरे के प्रसंस्करण उद्योग को मजबूती मिलने की बात कही, वहीं कुछ सदस्यों ने इस विधेयक से यूपीआई के जरिये होने वाले लेनदेन को कर दायरे में लाए जाने की संभावना पर चिंता जतायी।

सदस्यों ने कहा कि आज भारत की बहुत बड़ी आबादी यूपीआई के जरिये लेनदेन कर रही है, ऐसे में उसे कर दायरे में लाने से लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

विधेयक का उद्देश्य ‘‘विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता’’ उपलब्ध कराकर अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

इस विधेयक में ‘फंड मैनेजरों’ के भारत आने को आसान बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि विदेशी निवेश को भारत में कारोबार में लगा पैसा नहीं माना जाएगा।

इसका उद्देश्य उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 2040-41 तक बढ़ाना भी है, जो किसी भारतीय फैक्टरी को मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराती हैं और वो फैक्टरी अनुबंध विनिर्माण के तहत उनकी ओर से खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बनाती है।

विधेयक में उल्लेख की गई खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके मुख्य पार्ट्स और एक्सेसरीज शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्टरी को पुर्जों की आपूर्ति में मदद करने के लिए, यह विधेयक उन विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक 15 साल के लिए कर में छूट देने का प्रस्ताव करता है, जो भारत में अनुबंध विनिर्माता को आपूर्ति करने के लिए ‘कस्टम्स वेयरहाउस’ में पुर्जे रखती हैं।

विधेयक में उन विदेशी ‘क्लाउड’ कंपनियों के लिए मंज़ूरी की जरूरत को भी खत्म किया गया है जो भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती हैं।

इसमें यह भी प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय डेटा सेंटर को सिर्फ सीधे मालिकाना हक के तहत संचालित करने के बजाय पट्टे के आधार पर संचालित किया जाए।

विधेयक में संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए और आयकर अधिनियम की धारा 269एसयू में आवश्यक बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा प्रावधान के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले बड़े व्यवसायों के लिए ‘रुपे’ डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड सहित कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य है।

भाषा मनीषा माधव अविनाश

अविनाश

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