नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने सीमा सुरक्षा बलों में ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणाली के अधिग्रहण और तैनाती को प्राथमिकता देने और इस कार्य में तेजी लाने की सिफारिश की है।
‘‘देशी तकनीक को प्राथमिकता’’ और कमान-एवं-नियंत्रण प्रणाली पर जोर देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा ‘‘निगरानी, तस्करी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, इनके अधिग्रहण और तैनाती को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इस कार्य को तेज किया जाना चाहिए, विशेष रूप से सीमा सुरक्षा बलों में।’’
भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली, गृह मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने यह सिफारिश मंगलवार को दोनों सदनों में पेश की गई अपनी अनुदान मांगों की रिपोर्ट में की।
समिति ने कहा ‘‘देशी तकनीकी समाधान को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, और वास्तविक समय निगरानी, खुफिया जानकारी साझा करने और संचालन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत कमान एवं नियंत्रण तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।’’
समिति ने यह भी कहा कि ड्रोन के परिचालन और ‘काउंटर-ड्रोन’ उपकरणों के रखरखाव से संबंधित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में समिति ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के आधुनिकीकरण की चतुर्थ योजना का उद्देश्य मौजूदा तकनीकी संसाधनों और समकालीन परिचालन आवश्यकताओं के बीच अंतर को पाटना है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं और टेंडर से संबंधित मुद्दों के कारण अधिग्रहण में देरी चिंताजनक है।
समिति ने सिफारिश की कि बेहतर तकनीकी जाँच, पूर्व नियोजन और आपूर्ति समय-सारणी की निगरानी के साथ एक सुव्यवस्थित अधिग्रहण ढांचा अपनाया जाए, ताकि अंतिम समय की भागदौड़ और संलग्न देनदारियों के बोझ को रोका जा सके।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि हथियार, संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और सुरक्षा उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए योजना और सामान्य बजट दोनों में लगातार पूंजी आवंटन सुनिश्चित किया जाए, ताकि सीएपीएफ की विविध और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परिचालन तत्परता बढ़े।
समिति ने यह भी रेखांकित किया कि सीएपीएफ कर्मियों के लिए आवास इकाइयाँ ‘‘स्वीकृत क्षमता के मुकाबले काफी कम’’ हैं, वर्तमान में केवल 1,35,544 इकाइयाँ मौजूद हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता 2,68,346 इकाइयाँ है।
समिति ने कहा ‘‘वर्तमान में 10,430 इकाइयाँ निर्माणाधीन हैं, जिनके पूरी होने पर स्थिति में मामूली सुधार होगा। ’’
समिति ने सुझाव दिया कि आवास इकाइयों का निरंतर और समयबद्ध विस्तार किया जाए, जिसमें प्राथमिकता उन कर्मियों को दी जाए जो कठिन ड्यूटी, सीमा और उच्च जोखिम वाले परिचालन में तैनात हैं।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश