भुवनेश्वर/क्योंझर, 28 अप्रैल (भाषा) ओडिशा के क्योंझर जिले में बैंक से धन निकासी के लिए एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने के स्तब्ध कर देने वाले वीडियो क्लिप के सामने आने के बाद लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है, वहीं मूल बैंक ने स्पष्टीकरण दिया है कि उन्होंने केवल वैध दस्तावेज मांगे थे।
घटना के एक दिन बाद, राज्य के मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि इस मामले में ‘मानवीय दृष्टिकोण’ नहीं अपनाया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने भी इस घटना की निंदा की है और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी राज्य विधानसभा में खुद क्योंझर का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस घटना को ग्रामीण बैंकिंग प्रणाली की कठोर असंवेदनशीलता का प्रमाण बताते हुए बीजद के राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगाराज ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल करने में उनके तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत बताई।
बीजद ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी बहन के कंकाल को कंधे पर ले जा रहे व्यक्ति के दृश्य का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के जिले में एक अकल्पनीय दृश्य, क्रूरता की सभी सीमाओं को पार कर गया।’’
कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। बैंक अधिकारियों द्वारा इस तरह का उत्पीड़न बंद होना चाहिए।’’
इस घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री पुजारी ने कहा, ‘‘बैंक अधिकारियों के लिए मृत्यु प्रमाण-पत्र पर्याप्त नहीं था और उस व्यक्ति को खाताधारक (बहन) की मृत्यु को सत्यापित करने के लिए कब्र से कंकाल निकालना पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरे मामले में मानवीय दृष्टिकोण का अभाव था। मैंने स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। सरकार ने इस घटना का गंभीरता से संज्ञान लिया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इसके लिए जिम्मेदार बैंक अधिकारियों को दंडित किया जाए।’’
यह घटना सोमवार को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा में घटी।
डियानाली गांव के जीतू मुंडा (50) अपनी बड़ी बहन कालरा मुंडा (56) के बैंक खाते से 20,000 रुपये निकालना चाहते थे। कालरा का निधन 26 जनवरी को हो गया था।
जीतू मुंडा ने कहा, ‘‘मैं कई बार बैंक गया। मैंने उन्हें बताया कि मेरी बहन की मृत्यु हो गई है, फिर भी वे बार-बार यही कहते रहे कि मैं उन्हें (बहन को) बैंक लाऊं, ताकि उनके नाम पर जमा राशि निकाली जा सके।’’
कंकाल देखकर भयभीत बैंक अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
क्योंझर जिला स्थित पटना पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक किरण प्रसाद साहू ने बताया कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को वापस कब्रिस्तान ले जाकर दोबारा दफना दिया गया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘जीतू अनपढ़ है। उसे नहीं पता कि कानूनी वारिस या ‘नामित व्यक्ति’ (नॉमिनी) क्या होता है। बैंक अधिकारी उसे किसी रिश्तेदार की मृत्यु होने पर पैसे निकालने की प्रक्रिया नहीं समझा पाए।’’
इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने मंगलवार को एक विस्तृत बयान में कहा कि दावा निपटान प्रक्रिया को लेकर जागरुकता की कमी और शाखा प्रबंधक द्वारा बताई गई प्रक्रिया को समझने में व्यक्ति की अनिच्छा की वजह से घटना घटी लगती है।
आईओबी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बैंक का मकसद खाते में जमा गरीब आदिवासी महिलाओं के पैसों के हितों की रक्षा करना था। इसमें किसी भी तरह की उत्पीड़न की कोई बात नहीं है। बैंक, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में भी है। मृत्यु प्रमाण पत्र जमा होते ही, दावे का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर कर दिया जाएगा।’’
उसने कहा कि बैंक अधिकारियों ने पैसा निकालने के लिए मृतक के मौजूद रहने की मांग नहीं की थी, जैसा कि कुछ खबरों में दावा किया जा रहा है।
बयान के अनुसार शाखा प्रबंधक ने स्पष्ट कहा था कि मृत्यु होने पर मृत्यु प्रमाणपत्र समेत कोई वैध दस्तावेज जमा करने पर ही दावे का निपटारा किया जा सकता है।
खाता ओडिशा ग्रामीण बैंक में हैं जिसका संचालन इंडियन ओवरसीज बैंक के अधीन होता है।
भाषा
वैभव पवनेश
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