ट्रंप के सामने झुके नहीं प्रधानमंत्री, ‘यूपीआई टैक्स’ वापस लें: विपक्ष

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ट्रंप के सामने झुके नहीं प्रधानमंत्री, ‘यूपीआई टैक्स’ वापस लें: विपक्ष

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 08:09 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 08:09 PM IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) विपक्ष ने व्यापारिक यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुक गए हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के सामने ‘‘झुकना बंद करें, रीढ़ दिखाएं, डटकर खड़े हों’’ और ‘‘यूपीआई टैक्स’’ वापस लें।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक वीडियो जारी करके कहा, ‘‘एक बार (पूर्व प्रधानमंत्री) इंदिरा गांधी जी से पूछा गया था कि वह बाईं ओर झुकाव रखती हैं या दाईं ओर। उनका जवाब था कि मैं न बाईं ओर झुकाव रखती हूं, न दाईं ओर, मैं सीधे खड़ी रहती हूं। मोदी जी की अवधारणा बिल्कुल अलग है। वह न बाईं ओर हैं, न दाईं ओर, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का फैसला किया है।’’

गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘मोदी जी ने यूपीआई पर कर लगाकर हर भारतीय पर कर लगाया है और अमेरिका को बड़ी रकम दी जा रही है।’’

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘मोदी जी, यूपीआई टैक्स वापस लें। अभी।’’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘नोटा’ का नया अर्थ ‘नरेंद्र’स ऑनगोइंग ट्रम्प अपीजमेंट’ (नरेन्द्र मोदी का लगातार ट्रंप को खुश करना) कर दिया है।

रमेश ने सवाल किया कि क्या यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की घोषणा इसलिए की गई है ताकि अमेरिकी कार्ड कंपनियां यूपीआई से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत राय ने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के विचार का विरोध उचित है क्योंकि इससे अधिकतर वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी।

उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘हालांकि यह शुल्क उपयोगकर्ता से नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार को इसका भुगतान करना होगा। इसलिए राहुल गांधी ने इसका विरोध किया है और मैं भी इसका समर्थन करता हूं।’’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह फैसला उन्होंने अपनी मर्जी या विवेक से नहीं लिया है। जब हम अमेरिकी साम्राज्यवाद की बात करते हैं, तो यह उसके आगे झुकने जैसा है। अब उन्होंने दो हजार रुपये से कम के लेनदेन को लेकर स्पष्टीकरण दिया है।’’

झा ने आरोप लगाया, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने यह फैसला किसी दिखाई देने वाली ताकत के दबाव में लिया है। यह व्यापक प्रबंधन का हिस्सा है।’’

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लेना तय किया। इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा।

इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था समाप्त हो गई है। इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां लंबे समय से इस पर सवाल उठा रही थीं।

भाषा हक अमित

अमित