बेंगलुरु, 26 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं ने उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं। उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और उनके हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान ने खुद इस्तीफा नहीं दिया, उनसे इस्तीफा दिलवाया गया। यह किसी राजनीतिक दल या सरकार की इच्छा नहीं थी। यह देश के छात्रों, युवाओं और 130 करोड़ लोगों की इच्छा थी कि हमें भविष्य की रक्षा करनी चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि भविष्य युवाओं और छात्रों के साथ है, और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए तथा उनके हितों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह देश का कर्तव्य है।’’
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में अनियमितताओं के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हफ्तों तक चले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
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