नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में अपनी लंबी सांगठनिक पृष्ठभूमि वाले तीन बार के पार्षद प्रवेश वाही ने दिल्ली के नये महापौर का पदभार ग्रहण करने के बाद स्वच्छता एवं जलभराव से निजात को अपनी पहली प्राथमिकता बतायी है।
वाही के अनुसार, सार्वजनिक जीवन से उनका जुड़ाव आरएसएस के माध्यम से बाल्यकाल में शुरू हुआ और बाद में वह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) में शामिल हो गए।
उन्होंने कहा, “जब मैं 10 साल का था तब मैं आरएसएस से जुड़ा हूं।”
उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने 1990 के दशक के अंत तक विश्व हिंदू परिषद (विहिप) में अपनी सेवा दी।
वाही ने कहा कि वह औपचारिक रूप से 2002 में भाजपा में शामिल हुए।
उन्होंने कहा, “चुनावी राजनीति में आने से पहले मैं पार्टी में संगठनात्मक भूमिकाएं निभाते हुए आगे बढ़ा।’’
वाही पहली बार 2007 में पार्षद चुने गए थे और तब से उन्होंने कई रोहिणी जोनल कमेटी के अध्यक्ष और बाद में पिछले उत्तर दिल्ली नगर निगम में स्थायी समिति के अध्यक्ष समेत निगम में अपने विभिन्न कार्यकाल में कई जिम्मेदारियां निभायीं।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पहली बार 2007 में रोहिणी से पार्षद चुना गया था। फिर मैं नाहरपुर से पार्षद बना और मैंने 2012 से 2017 तक दूसरा कार्यकाल पूरा किया।’’
वाही ने पुरानी दिल्ली के एमसीडी स्कूल से स्कूली पढ़ाई की।
उन्होंने कहा, “मैं एक गैर-राजनीतिक परिवार से आता हूं। हालांकि मेरे एक चाचा ने मुझे आरएसएस और उसकी दैनिक गतिविधियों से परिचित कराया। इसी तरह मैं संघ में शामिल हुआ।”
वह पंजाबी खत्री परिवार से हैं तथा उनका परिवार मूल रूप से रावलपिंडी (पाकिस्तान) में रहता था।
वाही ने कहा कि बाजारों, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता में सुधार करना उनकी प्राथमिक प्राथमिकता होगी।
वाही ने कहा कि घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा करना और कचरे का पृथक्करण करना एमसीडी के लिए प्रमुख चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि लैंडफिल स्थलों पर बोझ कम करने के लिए निजी भागीदारी को शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों के दोहराव के कारण अतीत में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी, लेकिन अब इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
लैंडफिल स्थलों की सफाई के लंबे समय से लंबित कार्य का जिक्र करते हुए वाही ने कहा, ‘‘पहले प्रगति धीमी थी, लेकिन अब काम में तेजी आ रही है।’’
भाषा राजकुमार रंजन
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