निजी मलयालम समाचार चैनल के एमडी एंटो ऑगस्टीन को जमानत

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निजी मलयालम समाचार चैनल के एमडी एंटो ऑगस्टीन को जमानत

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 06:54 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 06:54 PM IST

कोच्चि, 22 सितंबर (भाषा) केरलम उच्च न्यायालय ने एक निजी मलयालम समाचार चैनल के प्रबंध निदेशक एंटो ऑगस्टीन को एक आबकारी मामले में मंगलवार को जमानत दे दी।

यह मामला वायनाड स्थित उनके पैतृक घर से अनुमेय सीमा से अधिक शराब की बोतलें बरामद होने से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (आरबीसी) के प्रबंध निदेशक ऑगस्टीन को राहत देते हुए कहा कि वह फिलहाल या अतीत में भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) से जुड़े किसी अन्य समान मामले में आरोपी नहीं रहे हैं।

न्यायमूर्ति एडप्पागथ ने कहा कि वह आईएमएफएल से जुड़े सभी मामलों में जमानत देते रहे हैं, जब तक कि आरोपी के खिलाफ एक से अधिक मामले न हों या उसके खिलाफ इसी तरह के अपराध करने का कोई पुराना रिकॉर्ड न हो।

न्यायाधीश ने कहा, “हालांकि याचिकाकर्ता (ऑगस्टीन) का आपराधिक इतिहास रहा है, लेकिन वह इसी प्रकृति के किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं है। इन कारणों से मुझे ऐसा कोई आधार नहीं मिलता कि किसी उद्देश्य से आवेदक को हिरासत में रखना आवश्यक है। इसलिए याचिकाकर्ता जमानत पर रिहा किए जाने का हकदार है।”

अदालत ने अभियोजन महानिदेशक (डीजीपी) टी. आसफ अली की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि आरबीसी के प्रबंध निदेशक ‘‘धनी और रसूखदार व्यक्ति’’ हैं। अदालत ने कहा कि ‘‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’’

अली ने अदालत को यह भी बताया कि ऑगस्टीन पुलिस के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी को पुलिस के सभी सवालों का जवाब देना जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि उन पर ऐसी शर्तें लगाई जा सकती हैं, जिनके तहत उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरबीसी के प्रबंध निदेशक को एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में दिया गया था और शराब की बरामदगी भी हो चुकी है।

ऑगस्टीन ने यह भी दावा किया था कि जिस मकान से शराब जब्त की गई थी, वह अब उनके कब्जे में नहीं है, क्योंकि जिस संपत्ति पर वह स्थित था, उसे बैंक ने एसएआरएफएईएसआई अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही के बाद 2022 में बेच दिया था।

वहीं, डीजीपी ने दलील दी कि भू-राजस्व रसीद और संबंधित ग्राम अधिकारी द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार संपत्ति अब भी ऑगस्टीन के कब्जे में थी।

ऑगस्टीन के वकील ने अदालत को बताया कि हालांकि संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरित हो चुका है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में अभी तक दाखिल खारिज नहीं किया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि जिस भवन से जब्ती की गई, उस पर आवेदक के स्वामित्व, कब्जे और उपयोग को लेकर गंभीर विवाद है।

अदालत ने कहा कि ऑगस्टीन को क्षेत्राधिकार वाले अदालत की संतुष्टि के अनुसार एक लाख रुपये का बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदार पेश करने पर जमानत पर रिहा किया जाए। साथ ही, उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया।

अन्य शर्तों में आगे के आदेश तक प्रत्येक शनिवार सुबह 10 बजे से पूर्वाह्न 11 बजे के बीच और जब भी आवश्यक हो, जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना, जमानत पर रिहा रहने के दौरान इसी तरह का कोई अपराध नहीं करना, मामले के गवाहों से संपर्क नहीं करना या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करना तथा निचली अदालत की अनुमति के बिना राज्य से बाहर नहीं जाना शामिल है।

कंपनी द्वारा प्रायोजित एक असफल फुटबॉल आयोजन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को ऑगस्टीन के पैतृक घर में शराब की बोतलें मिलने के बाद उन्हें 17 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

एसआईटी ने जब्त शराब को आबकारी विभाग को सौंप दिया था। इसके बाद आबकारी विभाग ने एक मामला दर्ज करके ऑगस्टीन को गिरफ्तार किया।

सतर्कता अदालत ने गत शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

भाषा अमित नरेश

नरेश