न्यायालय ने कारोबारी के शव की पहचान नहीं होने के बावजूद अंतिम संस्कार पर पुलिस से मांगा जवाब

Ads

न्यायालय ने कारोबारी के शव की पहचान नहीं होने के बावजूद अंतिम संस्कार पर पुलिस से मांगा जवाब

  •  
  • Publish Date - September 22, 2026 / 07:24 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 07:24 PM IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त और गुरुग्राम पुलिस को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि पहचान की पुष्टि नहीं होने के बावजूद दिल्ली के लापता रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा के शव का अंतिम संस्कार क्यों किया गया।

हरियाणा पुलिस को 10 सितंबर को मनचंदा का शव गुरुग्राम की एक नाली में पड़ा मिला था, लेकिन परिवार को इसकी सूचना 16 सितंबर को दी गई।

मनचंदा के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें शव बरामद होने की सूचना नहीं दी गई और अज्ञात शव का 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया गया।

जांच जारी रहने के बीच पुलिस ने मामले में अन्या वत्स और उसके पति संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने गुरुग्राम पुलिस से यह भी बताने को कहा कि शव बरामद होने से संबंधित जानकारी अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस) पोर्टल पर क्यों अपलोड नहीं की गई।

सुनवाई के दौरान, मानव तस्करी से जुड़ी समिति की अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि अदालत की टिप्पणियों के आधार पर, उन्होंने दिल्ली के एक व्यक्ति के लापता होने की घटना के संबंध में जानकारी ली है।

गुप्ता ने कहा कि गुरुग्राम में जिस व्यक्ति का शव मिला था, उसकी पहचान तीन दिन बाद हुई। उन्होंने कहा कि पहचान नहीं होने के कारण उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।

न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के लिए पांच अक्टूबर की तारीख तय की है।

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि लापता लोगों के मामलों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का उसका आदेश हर व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे उनकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।

शीर्ष अदालत ने भारत में 47,000 बच्चों के लापता होने का 22 मई को जिक्र करते हुए देशभर के पुलिस अधिकारियों को लापता लोगों के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था और कहा था कि मानव तस्करी रोधी इकाइयों को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए।

कई निर्देश जारी करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने लापता बच्चों के मामलों की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि ये बच्चे अक्सर अंतरराज्यीय संगठित मानव तस्करी गिरोहों का शिकार बन जाते हैं।

न्यायालय ने कहा था, ‘‘केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को देश के प्रत्येक पुलिस थाने को एक मंच से जोड़ने वाला अखिल भारतीय ग्रिड स्थापित करने का निर्देश दिया जाता है। इसमें मानव तस्करी (जिसमें लापता बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं) से संबंधित मामलों के लिए एक विशेष पोर्टल होगा।’’

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप