जामिया में आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन

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जामिया में आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 10:08 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 10:08 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) जामिया मिलिया इस्लामिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक कार्यक्रम के खिलाफ मंगलवार को हुआ विरोध प्रदर्शन एसएफआई से संबद्ध छात्रों और विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्ड के बीच झड़प होने से हिंसक हो गया।

जामिया में ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) की इकाई से जुड़े छात्रों ने आरोप लगाया कि झड़प में वे घायल हो गए, हालांकि प्रशासन ने इस दावे का खंडन किया है।

छात्र विश्वविद्यालय द्वारा आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस और त्वरित प्रतिक्रिया बल के जवानों को परिसर के चारों ओर तैनात किया गया था।

एसएफआई द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, ‘कार्रवाई में 50 से अधिक छात्र घायल हो गए, जिनमें से कई को गार्ड ने पीटा…कई अन्य पर विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने हमला किया और उन्हें जबरन घसीटा।’

हालांकि, ‘पीटीआई भाषा’ से बात करते हुए विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने सभी आरोपों का खंडन किया।

अधिकारी ने कहा, ‘इस झड़प में किसी को कोई चोट नहीं आई। इसके अलावा, छात्रों ने उस कार्यक्रम पर आपत्ति जताई जिसे उचित प्रक्रिया के तहत आयोजित किया गया था।’

अधिकारी ने कहा, ‘किसी भी संगठन से संबद्ध प्रत्येक छात्र को किसी भी कार्यक्रम के संबंध में हमसे संपर्क करने का अधिकार है। इसके अलावा, मंगलवार को युवा कुंभ कार्यक्रम में हुई चर्चाएं युवाओं के भविष्य और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर केंद्रित थीं।’

इस आयोजन पर एक दिन पहले ही एसएफआई की जामिया इकाई ने आपत्ति जताई थी और इसे ‘प्रत्यक्ष उकसावा’ करार दिया था।

आइसा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और जामिया के छात्र सैयद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘यह वही जामिया है, जहां अन्य छात्र समूहों को सुरक्षा हस्तक्षेप के बिना चर्चा करने की भी अनुमति नहीं है, लेकिन आरएसएस को वातानुकूलित हॉल में पूरा कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई है।’

उन्होंने कहा कि छात्र भविष्य में भी इसी तरह की घटनाओं का विरोध करते रहेंगे ताकि ‘अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा’ कर सकें।

भाषा

शुभम वैभव

वैभव