नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में हुए विरोध प्रदर्शन के संबंध में गिरफ्तार किए गए भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को यह कहते हुए जमानत दे दी कि ‘‘किसी भी व्यक्ति को मात्र अनुमानों के आधार पर उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता’’।
हालांकि, चिब को जमानत देने के कुछ घंटे बाद ही, अदालत ने आईवाईसी प्रमुख द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और बॉण्ड के सत्यापन का आदेश दिया और कहा कि वह रविवार सुबह तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
चिब को उनकी चार दिन की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद शुक्रवार देर रात करीब एक बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट वंशिका मेहता के समक्ष उनके सरकारी आवास में पेश किया गया। अदालत ने 24 फरवरी को चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था।
दिल्ली पुलिस ने चिब की हिरासत और तीन दिन बढ़ाने की अपील की। अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि ‘‘जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है।’’
मजिस्ट्रेट ने हाथ से लिखे आदेश में कहा, ‘‘यह सर्वविदित है कि जमानत एक नियम है और कारावास एक अपवाद। जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है। किसी भी व्यक्ति को मात्र अनुमानों के आधार पर या केवल इसलिए कि सह-आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।’’
अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी (आईओ), चिब को और तीन दिनों तक पुलिस हिरासत में रखने के लिए ठोस कारण नहीं बता पाए।
अदालत ने कहा, ‘‘दोषी होना या न होना मुकदमे का विषय है और कानून इस मामले में अपना फैसला सुनाने की प्रक्रिया अपनाता है। हालांकि, महत्वपूर्ण यह है कि क्या इस स्तर पर आरोपी की हिरासत आवश्यक है। आरोपी भारतीय युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष है और समाज में उसकी मजबूत पकड़ है, इसलिए उसके फरार होने का खतरा नहीं है।’’
लोक अभियोजक ने दलील दी थी कि दो अन्य सह-आरोपियों के ठिकाने का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए चिब को आगे हिरासत में रखना आवश्यक है।
चिब के वकील ने दलील दी कि अनुच्छेद 21 संविधान की आत्मा है और प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए, एक ठोस स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, या यह साबित करने के लिए सबूत पेश किए जाने चाहिए कि हिरासत से इनकार करने से न्याय की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
उसने कहा, ‘‘यह दलील दी जा सकती है कि न्याय के दायरे को बढ़ाने के लिए उचित जांच अनिवार्य है। हालांकि, लंबी बहस के बावजूद, जांच अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि जांच के लिए पुलिस हिरासत की आवश्यकता क्यों है और इसका उद्देश्य क्या है।’
अदालत ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित एक महत्वपूर्ण मूल्य है और इसे कानून के अनुसार ही सीमित किया जा सकता है। खासकर तब, जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहा हो, उसकी स्वतंत्रता छीनने के लिए ठोस कानूनी आधार होना आवश्यक है। अभियोजन ने स्वयं स्वीकार किया है कि आरोपी चिब नोटिस मिलने पर जांच में शामिल हुए और अधिकारियों के समक्ष पेश हुए।’’
अदालत ने आईवाईसी अध्यक्ष को 50,000 रुपये का मुचलका जमा करने साथ ही अपना पासपोर्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा करने का निर्देश भी दिया।
हालांकि, अदालत ने मामले के एक अन्य आरोपी भूदेव शर्मा को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
अदालत ने कहा, “आरोपी भूदेव शर्मा प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए उनकी हिरासत आवश्यक है। तदनुसार, आरोपी भूदेव शर्मा को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा जाता है और उन्हें दो मार्च को एमएम (मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट) के समक्ष पेश किया जाए।”
अदालत ने चिब को 24 फरवरी को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। उनसे भारत मंडपम में हुए प्रदर्शन में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ की जानी थी।
भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों ने एआई सम्मेलन में अपनी कमीज उतारकर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने कमीजों के नीचे ऐसी टी-शर्ट पहन रखी थीं, जिन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी-नीत केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लिखे थे।
यह शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से शुरू हुआ था, जिसमें टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज, उद्योग जगत के नेता और नीति-निर्माता बड़ी संख्या में पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों की कार्यक्रम स्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर झड़पें भी हुई थीं।
भाषा अमित सुरेश
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