पंजाब : मुख्यमंत्री मान की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

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पंजाब : मुख्यमंत्री मान की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

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  • Publish Date - May 1, 2026 / 06:53 PM IST,
    Updated On - May 1, 2026 / 06:53 PM IST

चंडीगढ़, एक मई (भाषा) पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा शुक्रवार को राज्य विधानसभा में पेश विश्वास प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस दौरान आप विधायकों ने दोहराया कि वे चट्टान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहेंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने यह कदम अरविंद केजरीवाल नीत ‘आप’के सात राज्यसभा सदस्यों के पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घटना के कुछ दिन बाद उठाया है।

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि आप मजबूत है और उसका विस्तार हो रहा है।

मान ने सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें हैं कि ‘आप’ का सफाया हो जाएगा और उसके विधायक पाला बदल लेंगे, इससे लोगों के मन में भ्रम की स्थिति पैदा होती हैं।

विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति में सरकार द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पार्टी मजबूत है। जम्मू-कश्मीर से लेकर गोवा तक, पार्टी की मौजूदगी है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में हमारा एक विधायक है। पंजाब में हमारी सरकार सफलतापूर्वक चल रही है। दिल्ली में हम विपक्ष में हैं। गुजरात में हमारे पांच और गोवा में दो विधायक हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा ‘आप’ के विभिन्न स्थानीय निकायों में महापौर, पार्षद, सरपंच हैं, पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति है।’’

मान ने कहा, ‘‘हमने कड़ी मेहनत से पार्टी का गठन किया है और हम चट्टान की तरह (पार्टी अध्यक्ष अरविंद)केजरीवाल के साथ खड़े हैं।’’

सत्तारूढ़ दल ने इससे पहले सभी विधायकों को एक दिवसीय सत्र में उपस्थित होने के लिए ‘व्हिप’ जारी किया था।

पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में आप को भारी बहुमत प्राप्त है और उसके पास 94 विधायक हैं। सदन में कांग्रेस के 16, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का एक, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के तीन, भाजपा के दो विधायक हैं जबकि एक निर्दलीय विधायक है।

मान जब सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश कर रहे थे तो निर्दलीय विधायक राणा इंद्रजीत सिंह को छोड़कर कोई विपक्षी सदस्य मौजूद नहीं था। कांग्रेस ने सत्र से बहिर्गमन कर दिया था जबकि भाजपा ने इस विशेष सत्र का बहिष्कार किया है। शिअद और बसपा के विधायक भी सदन में नहीं थे।

प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आप के सात राज्यसभा सदस्यों के दलबदल को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।

चीमा ने भाजपा सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सहित केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ‘दुरुपयोग’ करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ‘‘गुंडागर्दी’’ कर रही है।

पार्टी विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर ने कहा कि वह ‘आप’ के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। निहाल सिंह वाला सीट से विधायक बिलासपुर ने कहा, ‘‘हम पार्टी के साथ हैं और पार्टी में बने रहेंगे।’’

मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि आप सरकार ने पिछले चार वर्षों में जन कल्याण के लिए ऐसा काम किया है जो पिछली सरकारों ने पिछले 70 वर्षों में नहीं किया था।

खरड़ सीट से विधायक अनमोल गगन मान ने कहा, ‘‘हम अपनी आखिरी सांस तक ‘आप’ के वफादार सिपाही बने रहेंगे।’’

आप को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात – राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल – ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से निर्वाचित हुए हैं।

राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर सातों सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी, जिससे उच्च सदन में आप के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई।

भाषा धीरज नरेश

नरेश