लोकतंत्र को मजबूत करने की कुंजी है शुद्ध मतदाता सूची: ज्ञानेश कुमार

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लोकतंत्र को मजबूत करने की कुंजी है शुद्ध मतदाता सूची: ज्ञानेश कुमार

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 01:58 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 01:58 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाए जाने की पृष्ठभूमि में बुधवार को कहा कि ‘‘शुद्ध’’ मतदाता सूची लोकतंत्र को मजबूत करने की कुंजी है।

उन्होंने यहां चुनाव प्रबंधन निकायों के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए इस बात का उल्लेख भी किया कि पिछले साल बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को शामिल करने या उनके नाम हटाने को चुनौती देने वाली एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई थी।

कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में एक लाख मतदान केंद्रों में से एक पर भी पुनर्मतदान का आदेश नहीं दिया गया था।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘कानून के अनुसार प्रत्येक मतदाता सहित शुद्ध मतदाता सूची, लोकतंत्र को मजबूत करने और उस मतदाता सूची के आधार पर होने वाले सभी चुनावों के लिए आवश्यक है।’’

उन्होंने कहा कि गहन सार्वजनिक छानबीन के बीच बिहार में मतदाता सूची को संशोधित किया गया।

उनके मुताबिक, मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण से लेकर चुनावों के संचालन तक, स्थानीय चुनाव मशीनरी द्वारा बड़े स्तर की दक्षता हासिल की गई।

विपक्षी दल एसआईआर को लेकर भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग पर हमला करते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि यह वोटों में हेरफेर करने का कदम है।

हालांकि, सरकार और चुनाव आयोग ने इस आरोप से इनकार किया है।

एसआईआर का दूसरा चरण पिछले साल चार नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ।

असम में मतदाता सूची का अलग से ‘विशेष पुनरीक्षण’ जारी है।

राज्यों में अंतिम एसआईआर ‘कट-ऑफ’ तिथि के रूप में काम करेगी, जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग निर्वाचन आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया था।

अधिकतर राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच हुआ था।

भाषा हक

हक वैभव

वैभव