मध्य दिल्ली में ‘स्लीपर’ बस पलटने के बाद पुलिस और जनता की त्वरित प्रतिक्रिया से कई जानें बचीं

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मध्य दिल्ली में ‘स्लीपर’ बस पलटने के बाद पुलिस और जनता की त्वरित प्रतिक्रिया से कई जानें बचीं

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 08:32 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) दिल्ली के करोल बाग में मंगलवार देर रात जयपुर से आ रही एक तेज रफ्तार ‘स्लीपर’ बस के हनुमान मंदिर के पास पलटने के बाद पुलिस कर्मियों, पास के पिकेट स्टाफ और स्थानीय लोगों द्वारा चलाए गए त्वरित और समन्वित बचाव अभियान की मदद से कई लोगों की जान बचा ली गई।

हालांकि हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई और 23 अन्य घायल हो गए।

पुलिस ने बताया कि यह हादसा रात करीब एक बजे हुआ जब करीब 30 यात्रियों को लेकर आ रही बस एक गोलचक्कर पर एक मोड़ पर नियंत्रण खो बैठी और पलट गई।

कुछ ही क्षणों में इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।

पास में ही हाल में स्थापित पिकेट और बूथ पर तैनात पुलिस कर्मी सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में रहे।

मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘हमने एक तेज धमाके की आवाज सुनी और उसके बाद गोलचक्कर के पास धूल और धुएं का गुबार उठता देखा।’

उन्होंने कहा कि कर्मचारी मौके की ओर दौड़े, तो देखा कि एक ‘स्लीपर’ बस पलट गई है और अंदर मौजूद लोग मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। कुछ यात्री बाहर निकलने की कोशिश में खिड़कियां तोड़ने का प्रयास कर रहे थे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त टीमों के पहुंचने से पहले ही पिकेट स्टाफ की त्वरित कार्रवाई बचाव प्रयासों को शुरू करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। रात्रि गश्त कर्मियों और करोल बाग थाने के अधिकारी भी जल्द ही पहुंच गए और कुछ ही मिनटों में एक समन्वित प्रतिक्रिया टीम बना ली गई।

पुलिसकर्मियों ने पास से गुजर रही एक जेसीबी मशीन को तुरंत रुकवाया और उसे काम पर लगा दिया। इस भारी मशीन का उपयोग पलटी हुई बस के एक हिस्से को सावधानीपूर्वक उठाने के लिए किया गया ताकि नीचे और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए जगह बनाई जा सके।

अधिकारी ने कहा, ‘बस को स्थिर करने और बचाव के दौरान उसे हिलने से रोकने के लिए पास में पड़े बड़े सीमेंट के ब्लॉक और पत्थरों को बस के नीचे रखा गया। जेसीबी चालक ने तुरंत सहयोग किया। हमने बस को थोड़ा सा उठाया और भारी पत्थरों को उसके नीचे रख दिया ताकि हम यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल सकें।’

क्षतिग्रस्त वाहन से पीड़ितों को बाहर निकालने में स्थानीय लोगों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, ‘मैंने खिड़कियां तोड़ने के लिए एक बड़ा पत्थर उठाया। हमने खिड़कियों के नुकीले किनारों पर कपड़े और बस की सीटें रख दीं ताकि बाहर निकलते समय किसी को चोट न लगे। फिर हमने एक-एक करके यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया।’

उन्होंने कहा, ‘मेरा एकमात्र लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना था। लोग रो रहे थे, कुछ बेहोश थे।”

जैसे-जैसे बचाव अभियान तेज हुआ, दिल्ली अग्निशमन सेवा की टीमें और अतिरिक्त पुलिस इकाइयां मौके पर पहुंचीं और इस प्रयास में शामिल हो गईं। अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बस के हिस्सों को काटने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया।

पुलिस ने कहा कि संयुक्त प्रयासों के कारण सभी 23 घायल यात्रियों को निकाल लिया गया, जिनमें कई ऐसे लोग भी शामिल थे जो बस पलटने पर ‘स्लीपर’ बर्थ में फंस गए थे। उनमें से कई को टक्कर और कांच के टूटे टुकड़ों के कारण चोटें आई।

एम्बुलेंस की व्यवस्था तेजी से की गई और घायलों को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल, सर गंगा राम अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज सहित नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया।

पुलिस के अनुसार, 12 घायलों को आरएमएल अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में दो पुरुषों ने दम तोड़ दिया, 10 को सर गंगा राम अस्पताल और एक को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया गया, जबकि जिन्हें मामूली चोटे आई थी उन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

उन्होंने बताया कि कई घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।

मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने कहा, ‘जनता के सहयोग से पुलिस कर्मियों द्वारा समय पर किया गया हस्तक्षेप एक बड़ी त्रासदी को रोकने में सहायक रहा।’

उन्होंने यह भी कहा, “पिकेट स्टाफ, रात्रि गश्त टीमों और स्थानीय निवासियों की तत्काल प्रतिक्रिया ने कई लोगों की जान बचाने में मदद की। बिना किसी देरी के बचाव अभियान शुरू किया गया और सभी फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया।”

पुलिस ने बस के चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जो खुद भी घायल है, और घटना की आगे की जांच जारी है।

महेश अपने भाई मुकेश (30) के साथ हरियाणा से बस में सवार हुआ था, जहां वे साथ काम करते थे। जहां इस घटना में महेश की मौत हो गई, वहीं मुकेश बच गया, जिसकी जींस पर लगे उसके भाई के खून के धब्बे एक दुखद कहानी बयां कर रहे थे।

मुकेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘हमने चालक को कई बार गाड़ी को धीमा चलने के लिए कहा, लेकिन उसने हमारी विनती पर कोई ध्यान नहीं दिया। वह नशे में भी था। रात करीब 11.30 बजे, उसने एक भोजनालय के पास बस रोकी और हमें फ्रेश होने और खाना खाने के लिए कहा। बस आधे घंटे के लिए वहां रुकी थी।’

मुकेश ने दावा किया कि हालांकि, बस लगभग एक घंटे तक वहां खड़ी रही, जिस दौरान चालक ने शराब पी। उसने यह भी आरोप लगाया कि बस में कोई आपातकालीन निकास नहीं था।

हालांकि, पुलिस ने एमएलसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चालक के नशे में होने से इनकार किया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हालांकि वहां एक आपातकालीन निकास था, लेकिन दरवाजे जाम हो गए थे। वे यह देखने के लिए वाहन का यांत्रिक निरीक्षण करेंगे कि क्या बस में कोई यांत्रिक खराबी थी।

एक प्रत्यक्षदर्शी गोपाल ने बताया कि त्वरित बचाव कार्य के कारण घटना ने भीषण रूप नहीं लिया।

उसने बताया कि कैसे इलाके के स्थानीय लोग, जिनमें छोटे दुकानदार और राहगीर शामिल थे, बिना किसी झिझक के बचाव प्रयासों में मदद करने के लिए दौड़ पड़े।

भाषा नोमान

नोमान रंजन

रंजन