राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के परमाणु रिएक्टर की ऐतिहासिक उपलब्धि व वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की

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राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के परमाणु रिएक्टर की ऐतिहासिक उपलब्धि व वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 03:15 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 03:15 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के कल्पक्कम परमाणु रिएक्टर की ऐतिहासिक उपलब्धि एवं वैज्ञानिकों के योगदान की बृहस्पतिवार को सराहना की।

छह अप्रैल 2026 को कलपक्कम में 500 मेगावाट के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक अपनी पहली ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली। किसी परमाणु बिजली घर में पहली ‘क्रिटिकैलिटी’ वह अवस्था है जब नाभिकीय विखंडन की श्रृंखला अभिक्रिया सतत और नियंत्रित तरीके से चालू होती है।

उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र किया और कहा कि यह उपलब्धि ‘‘हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्योगों और परमाणु ऊर्जा विभाग की विभिन्न इकाइयों के निरंतर प्रयासों की सफल परिणति है।’’

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से भारत अपने तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है, जिसमें फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में प्लूटोनियम का उपयोग कर अधिक ईंधन उत्पन्न किया जाता है। तीसरे चरण में थोरियम-यूरेनियम आधारित रिएक्टर शामिल होंगे।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘पारंपरिक रिएक्टर के विपरीत, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में खपत से अधिक ईंधन उत्पादन करने की विशेष क्षमता होती है।’’ उन्होंने कहा कि पीएफबीआर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा डिजाइन किया गया है और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम (भविनी) द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी प्रयासों से तैयार किया गया है।

राधाकृष्णन ने जिक्र किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मार्च 2024 में पीएफबीआर में ‘‘कोर लोडिंग’’ का व्यक्तिगत रूप से अवलोकन किया था।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन और 2070 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, और सरकार के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य के अनुरूप है।

सभापति ने दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित सतत परमाणु ऊर्जा दोहन और विकास अधिनियम (शांति) का भी उल्लेख किया, जिसके तहत नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को सभी हितधारकों के लिए खोल दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जिन्होंने इस उन्नत प्रौद्योगिकी में महारत हासिल की है।

उन्होंने इस उपलब्धि में शामिल सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग भागीदारों की सदन की ओर से सराहना की।

भाषा अविनाश मनीषा

मनीषा