ओएससी की स्थिति पर राहुल ने उठाए सवाल, कहा- ‘मोदी सरकार किसी की नहीं सुन रही’

Ads

ओएससी की स्थिति पर राहुल ने उठाए सवाल, कहा- ‘मोदी सरकार किसी की नहीं सुन रही’

  •  
  • Publish Date - April 5, 2026 / 12:15 PM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 12:15 PM IST

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की ओर से हिंसा प्रभावित महिलाओं की मदद के उद्देश्य से बनाए गए ‘वन स्टॉप सेंटर’ (ओएससी) से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए रविवार को दावा किया कि “मोदी सरकार किसी की नहीं सुन रही है।”

गांधी ने कहा कि सुरक्षा केवल एक योजना नहीं, बल्कि सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।

उन्होंने अपने ‘व्हाट्सऐप चैनल’ पर एक पोस्ट में कहा, “महिलाएं मदद के लिए दरवाजा खटखटा रही हैं और सरकार ने दरवाजे बंद कर रखे हैं। मैंने संसद में पूछा: जब कोई महिला हिंसा से भागकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है तो उसे मदद क्यों नहीं मिलती, ताला क्यों मिलता है? स्टाफ की कमी क्यों है? देश भर की शिकायतें अनसुनी क्यों हैं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का जवाब क्या था? सब ‘संतोषजनक’ है। अगर सब ‘संतोषजनक’ है, तो ओएससी को लेकर इतनी समस्याओं की खबरें क्यों सामने आ रही हैं?’’

राहुल ने सवाल किया, ‘‘अगर सुरक्षा प्राथमिकता है, तो हर पांच में से तीन महिलाओं तक मदद अभी भी क्यों नहीं पहुंच पा रही है? और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के हर 100 रुपये में से सिर्फ 60 पैसे ही ओएससी पर क्यों खर्च हो रहे हैं?’’

उन्होंने कहा, “सुरक्षा कोई योजना नहीं, बल्कि सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है। हर बात को ‘संतोषजनक’ कहना सुरक्षा नहीं देता; यह दिखाता है कि मोदी सरकार किसी की भी सुन नहीं रही है।’’

लोकसभा में 27 मार्च को पूछे गए अपने प्रश्न में राहुल ने जानना चाहा था कि क्या कई ओएससी बंद पड़े हैं, निष्क्रिय हैं या निर्धारित 24 घंटे संचालित नहीं हो रहे हैं।

उन्होंने पिछले पांच वर्षों में राज्यवार और वर्षवार ओएससी में सहायता और आश्रय लेने वाली महिलाओं की संख्या तथा महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित दर्ज मामलों का विवरण भी मांगा था।

उन्होंने पिछले पांच वर्षों में राज्यवार और वर्षवार संचालित ओएससी तथा खोले गए नए ओएससी की संख्या, और इस अवधि में जारी तथा उपयोग किए गए धन का विवरण भी मांगा था, साथ ही धन के कम उपयोग के कारणों की जानकारी चाही थी।

राहुल ने ओएससी में स्वीकृत और भरे गए पदों—जैसे प्रशासक, केस वर्कर, काउंसलर, चिकित्सा अधिकारी और पुलिसकर्मी का राज्यवार ब्योरा भी मांगा था। इसके अलावा उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या मंत्रालय ने कुप्रबंधन या संचालन दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच की है, और यदि हां, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लिखित उत्तर में कहा कि ओएससी, ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत ‘संबल’ घटक का हिस्सा है, जो हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर समेकित और तत्काल सहायता प्रदान करता है।

उन्होंने कहा, “यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता तथा मनोवैज्ञानिक-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। एक अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक देश में 13.37 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी गई है।”

मंत्री ने बताया कि ओएससी योजना का समग्र क्रियान्वयन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के जिम्मे है।

ठाकुर ने कहा, “मिशन शक्ति और इसके ओएससी घटक समेत मंत्रालय की योजनाओं का तृतीय पक्ष द्वारा 2020 और 2025 में नीति आयोग के माध्यम से मूल्यांकन किया गया। इन अध्ययनों में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और स्थिरता संतोषजनक पाई गई है।”

भाषा खारी गोला

गोला