हैदराबाद, पांच अप्रैल (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों की राज्य सरकारें यह मानती हैं कि न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक अनिवार्य है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय जोन-2 (जिसमें न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीश के लिए आवासीय भवन शामिल हैं) का शिलान्यास करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब न्यायपालिका और कार्यपालिका उद्देश्य में एकजुट होती हैं, तो संविधान वास्तव में जीवंत हो उठता है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश भर में बना यह माहौल मुझे बहुत आत्मविश्वास देता है। पिछले कुछ महीनों में ही मुझे उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम और अब तेलंगाना में न्यायिक परिसर के शिलान्यास का अवसर मिला है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सभी राजनीतिक दलों की राज्य सरकारें यह मान रही हैं कि न्यायिक ढांचे को मजबूत करना वैकल्पिक नहीं, बल्कि अत्यंत आवश्यक है।’’
प्रस्तावित परियोजना के नक्शों और मॉडल को देखने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 100 एकड़ में बनने वाला नया उच्च न्यायालय परिसर देश के सर्वश्रेष्ठ परिसरों में से एक होगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के साथ चर्चा के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि पूरे उच्च न्यायालय परिसर का निर्माण दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिसमें आवासीय और अन्य बुनियादी ढांचा शामिल है।
उन्होंने इस प्रतिबद्धता के लिए राज्य सरकार को बधाई दी।
तेलंगाना सरकार ने पहले ही इस नए उच्च न्यायालय परिसर के लिए 100 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा और निर्माण के लिए 2,583 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां, न्यायमूर्ति एस वी भट्टी, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अर्पेश कुमार सिंह ने भी सभा को संबोधित किया।
भाषा गोला दिलीप
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