कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद रेलवे की परीक्षा स्थगित

Ads

कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद रेलवे की परीक्षा स्थगित

  •  
  • Publish Date - March 17, 2026 / 08:30 PM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 08:30 PM IST

बेंगलुरु, 17 मार्च (भाषा) दक्षिण पश्चिम रेलवे ने रेलवे की परीक्षाएं केवल अंग्रेजी और हिंदी में कराने के खिलाफ कन्नड़ समर्थक संगठनों के प्रदर्शन के बाद मंगलवार को अचानक भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं।

कर्नाटक रक्षणा वेदिके के सदस्य बेंगलुरु और हुबली में परीक्षा केंद्रों के बाहर एकत्र हुए और कन्नड़ में भी परीक्षा कराने की मांग की।

दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) के एक अधिकारी ने कहा, “विरोध प्रदर्शनों के कारण भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और अगली तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। ”

अधिकारियों ने बताया कि एसडब्ल्यूआर ने मालगाड़ी प्रबंधक के 194 पद समेत 295 पदों को भरने के लिए मंगलवार को परीक्षा निर्धारित की थी।

इस घटनाक्रम के बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ ‘इस तरह का अन्याय’ न हो।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया और मांग की कि रद्द की गईं परीक्षाएं जल्द से जल्द आयोजित की जाएं और कन्नड़ भाषा में भी परीक्षा देने की व्यवस्था की जाए।

कर्नाटक रक्षा वेदिके भर्ती परीक्षाओं से स्थानीय भाषा को हटाने के कदम का विरोध कर रही है। उसका कहना है कि इससे स्थानीय उम्मीदवारों को परीक्षा देने से रोका जा सकता है। परीक्षा स्थगित होने का स्वागत करते हुए संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी किए बिना परीक्षाएं दोबारा आयोजित की गईं तो वे विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करेंगे।

कर्नाटक रक्षा वेदिके के सदस्य हनुमंथप्पा अंबिगेरी ने हुबली में पत्रकारों से कहा, ‘प्रत्येक राज्य की भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों को उनके संबंधित राज्य की भाषाओं जैसे कर्नाटक में कन्नड़, तमिलनाडु में तमिल, महाराष्ट्र में मराठी में परीक्षा देने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि स्थानीय उम्मीदवारों को उच्च पदों पर सेवा करने के बेहतर अवसर मिल सकें।’

सिद्धरमैया ने ‘एक्स’ पर कहा कि रेलवे विभाग ने दक्षिण पश्चिम रेलवे में 194 मालगाड़ी प्रबंधक पदों और हुबली डिवीजन में 101 एलडीसीई पदों के लिए आज होने वाली पदोन्नति परीक्षाओं को अचानक रद्द कर दिया है, जिससे कन्नड़ कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

उन्होंने कहा कि कन्नड़ भाषी लोगों और कन्नड़ संगठनों के कड़े विरोध के बाद यह कदम उठाया गया है।

सिद्धरमैया ने बताया कि हजारों कन्नड़ भाषी कर्मचारियों ने स्थानीय भाषा में परीक्षा देने की सुविधा न होने पर पहले ही आपत्ति जताई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, विभाग समय पर प्रतिक्रिया देने में विफल रहा और अंतिम समय में परीक्षा रद्द कर दी, जिससे फिलहाल भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने कहा, ‘यदि विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए कन्नड़ में परीक्षा की अनुमति दी होती, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। इसके बजाय, विरोध प्रदर्शन तेज होने के बाद विभाग का उदासीन रवैया और अंतिम समय में परीक्षा रद्द करना निंदनीय है।’

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार की परीक्षाओं में कन्नड़ भाषी लोगों के साथ अन्याय का यह पहला मामला नहीं है और न ही यह आखिरी होगा।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘केंद्रीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं में हिंदी लगातार थोपे जाने के कारण, कन्नड़ उम्मीदवारों के साथ लंबे समय से अनुचित व्यवहार किया जा रहा है।’

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा तब हुआ है जब (राज्य के सांसद) वी. सोमन्ना रेल राज्य मंत्री हैं। मुझे उम्मीद थी कि वह कन्नड़ भाषी लोगों के लिए खड़े होंगे और इस अन्याय को दूर करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें केवल बातों तक सीमित न रहकर कर्नाटक के हित में काम करना चाहिए।” भाषा जोहेब नरेश

नरेश