राजस्थान: जयपुर के अस्पताल में दुर्लभ ‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ बीमारी का बिना सर्जरी इलाज

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राजस्थान: जयपुर के अस्पताल में दुर्लभ ‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ बीमारी का बिना सर्जरी इलाज

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 09:15 PM IST

जयपुर, 22 सितंबर (भाषा) राजस्थान के जयपुर स्थित एक अस्पताल में ‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग मरीज का बिना ओपन हार्ट सर्जरी के कैथेटर आधारित प्रक्रिया से सफल इलाज किया गया। चिकित्सकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ बीमारी एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें हृदय के दाएं हिस्से का ट्राइकसपिड वाल्व असामान्य रूप से बड़ा और ढीला हो जाता है, जिससे वह पूरी तरह बंद नहीं हो पाता और रक्त वापस पीछे की ओर बहने लगता है।

चिकित्सकों के अनुसार, मरीज ‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ की बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण वाल्व में गंभीर रिसाव हो रहा था और इस स्थिति में हर बार दिल की धड़कन के साथ रक्त वाल्व से पीछे की ओर जाने लगता है।

यह प्रक्रिया हाल में राजस्थान अस्पताल में हस्तक्षेपी संरचनात्मक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र सिंह राव के नेतृत्व में डॉ. कैलाश चंद्र और डॉ. प्रशांत वार्ष्णेय की टीम ने की।

चिकित्सकों ने बताया कि मरीज करीब छह महीने से बीमारी के लक्षणों से परेशान था।

चिकित्सकों ने बताया कि ‘ट्राइकसपिड वाल्व बार्लो’ बीमारी में वाल्व का ऊतक असामान्य रूप से बड़ा और ढीला हो जाता है, जिससे वाल्व ठीक से बंद नहीं हो पाता।

उन्होंने बताया कि इसके कारण पैरों और पेट में सूजन, थकान तथा शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

चिकित्सकों ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान विशेष ट्राइकसपिड ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) उपकरण का इस्तेमाल किया गया।

डॉ. राव ने बताया कि वाल्व में रिसाव की गंभीरता और उसकी संरचना का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद सटीक उपचार किया गया।

उन्होंने बताया कि कैथेटर आधारित उपचार जटिल वाल्व रोग से पीड़ित ऐसे चुनिंदा मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनके उपचार के विकल्प सीमित होते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, मरीज को एक दिन गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में रखा गया और अगले दिन उसे चलाया गया।

भाषा बाकोलिया जितेंद्र

जितेंद्र

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