राजौरी मौत: जांच में कीटनाशक और कैडमियम के अंश मिले, संक्रमण की बात खारिज

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राजौरी मौत: जांच में कीटनाशक और कैडमियम के अंश मिले, संक्रमण की बात खारिज

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 10:24 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 10:24 PM IST

जम्मू, 29 मार्च (भाषा) राजौरी जिले के एक सुदूर गाँव में रहस्यमय परिस्थितियों में 17 लोगों की मौत के एक साल से अधिक समय बाद, जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस घटना की ताजा, हालांकि अस्थायी जांच रिपोर्ट में विशिष्ट कीटनाशक यौगिकों और कैडमियम के बढ़े हुए स्तर का हवाला दिया है

एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने कहा कि सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ द्वारा किए गए विषविज्ञान विश्लेषण के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, ये मौतें किसी विषाणु या जीवाणु जनित बीमारी से जुड़ी नहीं लगतीं।

उन्होंने शनिवार को अपने उत्तर में कहा, “इसके बजाय, कुछ नमूनों में एल्डीकार्ब सल्फोन, एसीटामिप्रिड और ब्यूटॉक्सीकार्बॉक्सिम जैसे कीटनाशक यौगिकों के साथ कैडमियम के बढ़े हुए स्तर की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि बीमारी का कारण न्यूरो-टॉक्सिक प्रभाव हो सकता है।”

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के विधायक जावेद इकबाल ने अपने बुढाल निर्वाचन क्षेत्र में 7 दिसंबर, 2024 से 24 जनवरी, 2025 के बीच हुई 17 मौतों के अंतिम निष्कर्षों के संबंध में प्रश्न उठाया था।

इटू ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) और एक अंतर-मंत्रालयी जांच दल इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं, ताकि मौत के सटीक कारण और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि करीबी रिश्तेदारों के कई परिवारों के सदस्यों में पेट दर्द, उल्टी, बुखार, सुस्ती, सांस लेने में तकलीफ और चेतना में परिवर्तन जैसे लक्षण विकसित हुए।

इटू ने बताया कि ये घटनाएं चार जगहों पर हुई, जिनमें कुल 55 लोग प्रभावित हुए और 17 लोगों की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत कंडी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजौरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज और जम्मू के एसएमजीएस अस्पताल में विशेष उपचार के लिए भर्ती कराया गया था।

इटू ने कहा कि घटनाओं के तुरंत बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन के समन्वय से व्यापक रोकथाम और जांच उपाय शुरू किए।

उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में मेडिकल कैंप लगाए गए और 3,577 लोगों को कवर करते हुए घर-घर निगरानी की गई।

मंत्री ने कहा कि भोजन, पानी, दवाओं और जैविक नमूनों को एकत्र कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया। जीएमसी राजौरी, जीएमसी जम्मू और एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए, जबकि एम्बुलेंस सेवाएं और चौबीसों घंटे मेडिकल टीमें तैनात की गईं।

उन्होंने बताया कि इस मामले की समीक्षा उच्चतम स्तर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा की गई और विस्तृत जांच के लिए आईसीएमआर, एनसीडीसी, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, एम्स नयी दिल्ली सहित अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की विशेषज्ञ टीमों को शामिल किया गया।

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप