लोकसभा क्षेत्रों का युक्तिकरण : सबसे अधिक और सबसे कम मतदाताओं वाले निर्वाचन क्षेत्रों पर नजर

Ads

लोकसभा क्षेत्रों का युक्तिकरण : सबसे अधिक और सबसे कम मतदाताओं वाले निर्वाचन क्षेत्रों पर नजर

  •  
  • Publish Date - April 19, 2026 / 04:46 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 04:46 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या को युक्तिसंगत बनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि अधिक मतदाताओं वाली सीट से निर्वाचित सांसद उनकी आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते।

शाह ने विपक्ष से 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाले विधेयक को पारित करने का समर्थन करने का आग्रह करते हुए शुक्रवार को संसद के निचले सदन में कहा था कि परिसीमन प्रक्रिया प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या को तर्कसंगत बनाने के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह ‘‘एक व्यक्ति, एक मत’’ के विचार को उसकी सच्ची भावना में लागू करने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने तेलंगाना के मलकाजगिरि का उदाहरण देते हुए कहा था कि इस लोकसभा सीट पर 20 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं और ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों के सांसद इतने मतदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते।

ऐसे में लोकसभा 2024 चुनाव में सबसे अधिक और सबसे कम मतदाता वाले निर्वाचन क्षेत्रों पर एक नजर डालते हैं।

निर्वाचन आयोग के 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी दिल्ली सहित पांच निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें से प्रत्येक में 20 लाख से अधिक मतदाता हैं। वास्तव में, दो सीट पर 30 लाख से अधिक मतदाता हैं। ये पांच निर्वाचन क्षेत्र चार राज्यों में अवस्थित हैं।

एक अधिकारी ने रेखांकित किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद यह आंकड़ा बदल गया होगा।

लोकसभा की पांच ऐसी सीटें हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 58,000 से लेकर 5.98 लाख के बीच है।

मतदाताओं की संख्या के आधार पर सबसे बड़े निर्वाचन क्षेत्रों की सूची में तेलंगाना की मलकाजगिरि सीट शामिल है, जहां पर कुल 37.80 लाख मतदाता पंजीकृत हैं।

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद सीट है, जहां पर करीब 29.48 लाख मतदाता हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश की गौतम बुद्ध नगर सीट पर कुल 26.81 लाख मतदाता हैं।

कर्नाटक की बेंगलुरु उत्तर सीट पर 32.15 लाख मतदाता हैं और पश्चिमी दिल्ली सीट पर 25.92 लाख मतदाता पंजीकृत हैं।

इसके विपरीत, लक्षद्वीप में लगभग 58,000 मतदाता हैं। दमन और दीव में मतदाताओं की संख्या 1.34 लाख है, जबकि लद्दाख में यह संख्या करीब 1.90 लाख है। दादरा और नागर हवेली में लगभग 2.83 लाख मतदाता हैं और अंडमान और निकोबार में 3.15 लाख मतदाता हैं।

परिसीमन का अभिप्राय है लोकसभा क्षेत्र की सीमा का पुनर्निर्धारण करना। लोकसभा क्षेत्र का पुनर्निर्धारण हो जाने पर विधानसभा क्षेत्रों का भी आकार बदल जाता है।

एक लोकसभा सीट के अंतर्गत कम से कम पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार द्वारा जारी किए गए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की एक सूची के अनुसार, महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक है। हालांकि, यह विधेयक शुक्रवार को पारित नहीं हो सका।

लोकसभा में सीट की संख्या का निर्धारण 1976 में किया गया और 1971 की 54 करोड़ की आबादी के आधार पर सीट की संख्या 550 निर्धारित की गई। हालांकि, अब देश की आबादी 140 करोड़ से अधिक हो गई है।

प्रश्नोत्तरी की सूची में कहा गया, ‘‘इसलिए, लोकसभा में कुल सीट की संख्या बढ़ाकर 850 करना अहम है। इससे संसद में लोगों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकेगा।’’

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप