एसआईआर के लिए ‘ग्रुप-बी’ के 8,505 अधिकारियों को उपलब्ध कराने को तैयार: बंगाल ने निर्वाचन आयोग से कहा

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एसआईआर के लिए ‘ग्रुप-बी’ के 8,505 अधिकारियों को उपलब्ध कराने को तैयार: बंगाल ने निर्वाचन आयोग से कहा

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  • Publish Date - February 8, 2026 / 01:44 PM IST,
    Updated On - February 8, 2026 / 01:44 PM IST

नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि वह राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए राज्य या उसके संस्थानों के ‘ग्रुप बी’ श्रेणी के 8,505 अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

यह बात इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वकील ने चार फरवरी को उच्चतम न्यायालय में दलील दी थी कि पश्चिम बंगाल सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख के लिए ‘ग्रेड 2’ के केवल 80 अधिकारियों की सेवाएं प्रदान की थीं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ सोमवार को पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है, जिसमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।

सूत्रों के अनुसार, बनर्जी सोमवार को फिर से उच्चतम न्यायालय आ सकती हैं। उन्होंने चार फरवरी को शीर्ष न्यायालय में पेश होकर खुद दलीलें पेश की थीं और वह पद पर रहते हुए ऐसा करने वाली पहली मुख्यमंत्री बनीं।

उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि वह एसआईआर के लिए राज्य या उसके संस्थानों के 8,505 ‘ग्रुप बी’ अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार और इच्छुक है।

चार फरवरी को निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि राज्य ने एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख के लिए एसडीएम जैसे केवल 80 ‘ग्रेड 2’ अधिकारियों की सेवाएं प्रदान की थीं।

द्विवेदी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इस प्रक्रिया के लिए केवल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे निम्न श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों को ही उपलब्ध कराया गया था।

बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग द्वारा मांगी गई सभी सेवाएं प्रदान की थीं।

उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ बनर्जी की याचिका का संज्ञान लिया और कहा कि योग्य व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए।

न्यायालय ने नोटिस जारी कर निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से नौ फरवरी तक याचिका पर जवाब मांगा।

भाषा गोला सुरभि

सुरभि