नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले ‘‘मुफ्त उपहारों के अतार्किक वादों’’ के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से सुनवाई करने का अनुरोध किया गया।
याचिका में ऐसे दलों का चुनाव चिह्न जब्त करने या उनका पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी जनहित याचिका पर केंद्र तथा निर्वाचन आयोग को 2022 में नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने इस मामले को यथाशीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।
उपाध्याय ने कहा कि इस याचिका का उल्लेख पांच फरवरी को शीघ्र सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष किया गया था और तब पीठ मार्च में इस पर सुनवाई करने को सहमत हो गई थी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अभी हमारे पास बहुत सारे मामले हैं। इस मामले में इंतजार किया जा सकता है।’’
अधिवक्ता ने कहा, ‘‘इस मामले पर सुनवाई होनी चाहिए। एक समिति बनाई जानी चाहिए। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई के अनुरोध का समर्थन किया।
पच्चीस जनवरी 2022 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमण के नेतृत्व वाली पीठ ने केंद्र और निर्वाचन आयोग से उस जनहित याचिका पर जवाब तलब किया था, जिसमें चुनावों से पहले ‘‘अतार्किक मुफ्त उपहार’’ देने का वादा करने या बांटने वाली राजनीतिक पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त करने या उनका पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
तत्कालीन पीठ ने इसे ‘‘गंभीर मुद्दा’’ बताया था और कहा कि कभी-कभी ‘‘मुफ्त सुविधाओं का बजट नियमित बजट से अधिक हो जाता है’’।
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह चुनाव से पहले सरकारी धन से ‘‘मुफ्त में उपहार देने के अतार्किक वादों’’ को मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करने वाला, समान अवसर की स्थिति को बिगाड़ने वाला तथा चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को दूषित करने वाला करार दे।
वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिए दायर याचिका में, एक विकल्प के तौर पर, केंद्र सरकार से इस संबंध में कानून बनाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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