तृणमूल के बागी सांसदों ने लोकसभा के अयोग्यता संबंधी नोटिस का जवाब देने के लिए और समय मांगा

Ads

तृणमूल के बागी सांसदों ने लोकसभा के अयोग्यता संबंधी नोटिस का जवाब देने के लिए और समय मांगा

  •  
  • Publish Date - September 22, 2026 / 06:50 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 06:50 PM IST

कोलकाता, 22 सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई के साथ जुड़ने वाले लोकसभा के 20 सदस्यों ने दलबदल रोधी कानून के तहत उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा जारी नोटिस का जवाब देने के लिए और चार सप्ताह का समय मांगा है। उन्हें दी गई समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो गई।

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की संसदीय दल की प्रमुख काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि सांसदों को अपने जवाब के लिए जरूरी सभी दस्तावेज अभी एकत्र करने हैं और इसलिए उन्होंने लोकसभा सचिवालय से और चार सप्ताह का समय मांगा है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को सांसदों को पत्र भेजकर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के उस पत्र पर जवाब मांगा था, जिसमें 20 एनसीपीआई सांसदों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध लोकसभा अध्यक्ष से किया गया था।

घोष दस्तीदार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमने तब लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था, जो हमें दे दिया गया। अब हमें कुछ और समय चाहिए क्योंकि 20 सांसदों को अभी सभी दस्तावेज एकत्र करने हैं। इसलिए हमने और चार सप्ताह का समय मांगा है।”

तृणमूल के ममता बनर्जी धड़े ने समय बढ़ाने के अनुरोध पर तत्काल प्रतिक्रिया दी। तृणमूल नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया में कहा, “अब वे किस पार्टी में हैं—क्या यह बताने के लिए भी उन्हें समय चाहिए? ये दलबदलू, अवसरवादी और एहसान फरामोश लोग बड़े-बड़े दावे करते हैं, फेसबुक पर क्रांति करते हैं और केवल भाजपा विरोधी वोट के सहारे चुनाव जीतकर भाजपा की सेवा करते हैं, लेकिन एक नोटिस का जवाब तक नहीं दे सकते?”

घोष की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर घोष दस्तीदार ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा, “इसका फैसला अदालत और लोकसभा को करना है।”

यह घटनाक्रम बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य को लेकर फिर शुरू हुई अटकलों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 एनसीपीआई सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

हालांकि अन्य असंतुष्ट सांसदों ने इस दावे को खारिज कर दिया था, जबकि भाजपा ने भी इससे दूरी बना ली थी।

सांसदों की स्थिति को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद जून में तृणमूल के 27 लोकसभा सदस्यों में से 20 ने पार्टी छोड़ दी और एनसीपीआई में शामिल होकर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया।

हालांकि, लोकसभा के रिकॉर्ड में अब भी उन्हें तृणमूल के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि अलग एनसीपीआई संसदीय दल के रूप में मान्यता देने का उनका अनुरोध अभी विवाद का विषय बना हुआ है।

तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने जून में दसवीं अनुसूची के तहत उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएं दायर की थीं।

इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने 25 अगस्त को बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा जल्द फैसला किए जाने का अनुरोध किया गया था।

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत