रेड बैलून एयरोस्पेस ने भारत का पहला स्वदेशी ‘सुपर-प्रेशर बैलून’ छोड़ा

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रेड बैलून एयरोस्पेस ने भारत का पहला स्वदेशी ‘सुपर-प्रेशर बैलून’ छोड़ा

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 04:59 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 04:59 PM IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) ‘रेड बैलून एयरोस्पेस’ ने बुधवार को देश का पहला स्वदेशी ‘सुपर-प्रेशर बैलून’ (एसपीबी) छोड़ा, जिसमें देश-विदेश के सात साझेदारों के वाणिज्यिक उपकरण लगे हुए हैं।

एसपीबी अत्यधिक ऊंचाई पर जाने वाले गुब्बारे होते हैं जिन्हें आसपास के वायुमंडलीय दबाव से अधिक आंतरिक दबाव बनाये रखने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे वे लंबे समय तक भार वहन कर सकते हैं।

विजयवाड़ा के इंदिरा गांधी स्टेडियम से छोड़ा गया ‘विस्टा’ नाम का एसपीबी लगभग 25 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।

रेड बैलून एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सीवीएस किरण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह मिशन सुपर-प्रेशर बैलून की क्षमता को साबित करने के लिए है, जो भारत में पहले कभी नहीं किया गया है। इसमें गुब्बारे के डिजाइन और सामग्री को साबित करना शामिल है।’’

बुधवार को छोड़े गए गुब्बारे के 24 घंटे तक आसमान में रहने की उम्मीद है, लेकिन कंपनी का मुख्य लक्ष्य ऐसे एसपीबी विकसित करना है जो महीनों तक हवा में रह सके।

यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है कि एसपीबी उपग्रहों की तुलना में कई फायदे प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, एसपीबी बहुत सस्ते होते हैं और उपग्रहों द्वारा किये जाने वाले सभी कार्यों को करने में सक्षम होते हैं।

कंपनी के अनुसार, एसपीबी आमतौर पर पृथ्वी की सतह से 20 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित समताप मंडल की एक उच्च-स्तरीय क्षेत्र में स्थापित किए जाते हैं।

कंपनी ने बताया कि इससे वे दूरसंचार कवरेज प्रदान कर सकते हैं, सैकड़ों किलोमीटर तक फैले बड़े औद्योगिक नेटवर्क की निगरानी कर सकते हैं और पूरे राज्यों में आपदा प्रबंधन कार्यों में सहायता कर सकते हैं। साथ ही, रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए निरंतर स्थानिक अवलोकन को सक्षम बना सकते हैं।

कंपनी की योजना चालू वित्त वर्ष के दौरान ऐसे 12 से 16 गुब्बारे छोड़ने की है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश