नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा आवंटित किए गए आधे से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से मंजूरी मिलने में देरी के कारण अभी तक चालू नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे शहर में कुल 1,047 ईवी चार्जिंग स्टेशन आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 185 निगम के पार्किंग स्थलों पर और 809 सड़क किनारे स्थित हैं। हालांकि, अब तक करीब 460 स्टेशन को ही चालू किया जा सका है।
अधिकारियों ने बताया कि शेष स्टेशन के संचालन में देरी का मुख्य कारण सड़क किनारे के स्टेशन के लिए पीडब्ल्यूडी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का लंबित होना और चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के तहत प्रदूषण-रोधी उपायों के कारण काम में आई रुकावटें हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सबसे बड़ी बाधा सड़क किनारे के स्थानों के लिए पीडब्ल्यूडी की मंजूरियों से जुड़ी है। कई मामलों में अनुमति लंबित हैं, जिससे इन्हें चालू करने में देरी हो रही है।’
अधिकारी ने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर आवश्यक बिजली की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं ने भी इस देरी में भूमिका निभाई है, जिसके लिए बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ समन्वय की आवश्यकता पड़ रही है।
इस बीच, पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने एमसीडी द्वारा बताए गए लंबित एनओसी आवेदनों की जानकारी होने से इनकार किया है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि विभाग एकल चार्जिंग प्वॉइंट के बजाय एकीकृत ईवी बुनियादी ढांचा हब विकसित करने की एक व्यापक योजना पर काम कर रहा है।
पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें एमसीडी द्वारा भेजी गई एनओसी मंजूरियों की जानकारी नहीं है। हालांकि, पीडब्ल्यूडी काफी समय से अलग-थलग स्थानों पर ईवी चार्जिंग इकाइयां स्थापित करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय, विचार ऐसे एकीकृत बुनियादी ढांचा हब विकसित करने का है, जहां ईवी चार्जिंग स्टेशन के साथ-साथ पीयूसी केंद्र, पेट्रोल पंप और जलपान क्षेत्र जैसी सुविधाएं एक साथ हों, ताकि वाहन चालक एक ही स्थान पर कई तरह की सेवाओं का लाभ उठा सकें।’
भाषा सुमित सुरेश
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