जयपुर, नौ मार्च (भाषा) राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक व कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए निरीक्षकों द्वारा समय-समय पर नमूने लेकर जांच कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि नमूनों के अमानक पाए जाने पर संबंधित इकाई के खिलाफ नियमानुसार जब्ती, प्राथमिकी, विक्रय पर रोक एवं लाइसेंस निरस्त तथा निलंबन आदि की कार्रवाई की जाती है।
मीणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषि आदानों के नमूनों की कुल वार्षिक विश्लेषण क्षमता वर्ष 2024-25 में 59 हजार नमूने प्रतिवर्ष को वर्ष 2025-26 में लगभग 29 प्रतिशत बढ़ाते हुए 76,250 किया गया है।
कृषि मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान विधायक हरीश चौधरी के पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि उर्वरक, बीज एवं कीटनाशकों के अमानक पाए जाने पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के माध्यम से तथा कंपनी द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति करने का प्रावधान वर्तमान में नहीं है।
इससे पहले, चौधरी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में माह जनवरी 2026 तक विभिन्न स्थानों पर खराब, संदेहास्पद उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक के लिए गए नमूनों में से कुल 2,220 नमूने अमानक पाए गए। उन्होंने इनका विवरण सदन के पटल पर रखा।
कृषि मंत्री ने बताया कि उक्त्त अमानक पाए गए नमूनों के संबंध में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, बीज अधिनियम 1966, बीज नियंत्रण आदेश 1983, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं कीटनाशी अधिनियम 1968 व कीटनाशी नियम 1971 में वर्णित प्रावधानों के तहत कार्रवाई प्रक्रियाधीन है जिसमें अब तक 466 प्रकरणों में न्यायालय में वाद दायर हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक 117 मामलों में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इनमें 33 मामलों में गिरफ्तारी, 27 मामलों में चालान, 39 में अनुज्ञा पत्र निरस्त, 215 अनुज्ञा पत्र निलंबित तथा 128 जब्ती की कार्रवाइयां की गयी हैं।
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रवि कांत