तमिलनाडु : अन्नाद्रमुक के 30 बागी विधायक टीवीके को समर्थन देने की घोषणा करेंगे

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तमिलनाडु : अन्नाद्रमुक के 30 बागी विधायक टीवीके को समर्थन देने की घोषणा करेंगे

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 05:11 PM IST

चेन्नई, 12 मई (भाषा) तमिलनाडु में विपक्षी दल अन्नाद्रमुक में मंगलवार को विभाजन के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए, जब पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी के खिलाफ विधायकों के एक बड़े समूह ने बगावत कर दी और उन पर प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ पर्दे के पीछे से गठबंधन की कोशिश करने का आरोप लगाया।

इसके साथ ही इस गुट ने अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है। टीवीके सरकार बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी।

अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि और सी.वे. षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायकों के बागी गुट में होने की संभावना है। इस गुट ने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इन चुनावों में अन्नाद्रमुक ने जिन 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से वह केवल 47 सीटें ही जीतने में सफल रही थी।

षणमुगम ने पत्रकारों से कहा कि वे आज मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उनकी सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र सौंपेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी के महासचिव पलानीस्वामी द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक का गठन ही द्रमुक के विरोध और ‘सफाये’ के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सदस्यों ने एम के स्टालिन की अगुवाई वाली पार्टी के समर्थन से सरकार बनाने के पलानीस्वामी के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव अन्नाद्रमुक के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है क्योंकि इसका गठन ही द्रमुक का विरोध करने और उसे ‘जड़ से उखाड़ने’ के लिए किया गया था।

अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने इन आरोपों को ‘अफवाह’ बताकर खारिज कर दिया है।

अन्नाद्रमुक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि वेलुमणि, षणमुगम और सी विजयभास्कर खुद टीवीके सरकार में मंत्री पद पाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता पलानीस्वामी के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा गठबंधन के फैसले मुट्ठी भर विधायकों द्वारा नहीं लिए जा सकते।

एमजीआर द्वारा स्थापित अन्नाद्रमुक की इस अंदरूनी कलह ने पार्टी के उन आंतरिक सत्ता संघर्षों की यादें ताजा कर दी हैं, जो 1987 में संस्थापक एम. जी. रामचंद्रन और फिर 2016 में मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद देखे गए थे।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने दोनों दलों के बीच चुनाव के बाद गठबंधन की बातचीत के षणमुगम के दावों को खारिज कर दिया और उन पर अपनी ही पार्टी के भीतर ‘फूट’ डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

षणमुगम की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए द्रमुक के संगठन सचिव आर. एस. भारती ने दावा किया कि अन्नाद्रमुक नेता ने टीवीके सरकार का समर्थन करने का फैसला किया है और इसीलिए उन्होंने यह ‘आधारहीन आरोप’ लगाये हैं।

द्रमुक के संगठन सचिव आर. एस. भारती ने यहां पत्रकारों से कहा कि पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि द्रविड़ प्रमुख (द्रमुक) एक विपक्षी दल के रूप में अपनी भूमिका निभाएगी।

वहीं, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने मंगलवार को दावा किया कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने के लिए संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वी टीवीके को सत्ता से दूर रखने के लिए एक संभावित गठबंधन का नेतृत्व उन्हें सौंपने पर विचार कर रहे थे।

थिरुमावलवन ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘मुझे जानकारी मिली कि उन्होंने (द्रमुक-अन्नाद्रमुक) मुझे मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था। हालांकि, अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श करने के बाद हमने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।’

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा