(कुणाल दत्त)
नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) राजस्थानी पुरुषों के चमकदार ‘लाल आंगी’ पहनकर किए गए घुमावदार नृत्य ‘गेर’ से लेकर, असम के सजीले ‘सत्रिया’ नृत्य की प्रस्तुति देतीं सुसज्जित महिलाओं तक, देशभर से लगभग 2,500 कलाकार सोमवार को गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाने के लिए एक साथ आए। इस आयोजन ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, सौंदर्य और एकता की भावना को प्रदर्शित किया।
राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर ‘वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित लगभग 10 मिनट की प्रस्तुति में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित औपचारिक परेड के समापन पर दर्शकों को भारत के लगभग सभी नृत्य रूपों की झलक देखने को मिली।
भरतनाट्यम, ओडिसी और भांगड़ा से लेकर छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों के कम प्रसिद्ध ‘गेड़ी’ नृत्य और राजस्थान के ‘गेर’ नृत्य तक, इस प्रस्तुति में केवल दृश्य और वेशभूषा का भव्य प्रदर्शन ही नहीं था, बल्कि भारत की समृद्ध कला परंपराओं की एक संक्षिप्त झलक भी देखने को मिली।
बिलासपुर से आए और परेड में प्रस्तुति देने वाले लक्ष्मीनारायण मंडले ने बताया कि ‘गेड़ी’ नृत्य मानसून और फसल कटाई के मौसम में किया जाता है।
इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष थी। लगभग 100 कलाकारों ने ‘विविधता में एकता’ विषय पर आधारित प्रस्तुति के साथ परेड की शुरुआत की, जिसमें वाद्य यंत्रों का भव्य प्रदर्शन हुआ और देश की एकता तथा समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रभावशाली संदेश दिया गया।
महाराष्ट्र से लेकर मिजोरम तक के संगीतकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर ‘वंदे मातरम’ की धुन प्रस्तुत की।
परेड के दौरान सैन्य शक्ति के भव्य प्रदर्शन के बाद लगभग 2,500 कलाकारों का समूह कर्तव्य पथ पर एकत्र हुआ और इसने भारत के विविध रंगों की अनुपम छटा बिखेरी।
भाषा शुभम शोभना
शोभना