Vishnu Ka Sushasan: सिमटा नक्सलवाद तो खिलखिलाया बस्तर, बना प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन का नया ठिकाना, साय सरकार के प्रयासों से मिली पहचान

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सिमटा नक्सलवाद तो खिलखिलाया बस्तर, बना प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन का नया ठिकाना, Vishnu Ka Sushasan Tourism and Waterfalls in Bastar

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 12:16 AM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 12:18 AM IST

रायपुरः Tourism and Waterfalls in Bastar: छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल लंबे समय तक नक्सलवाद की वजह से देश-दुनिया में गलत कारणों से जाना जाता रहा। घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और आदिवासी संस्कृति से भरपूर यह इलाका सुरक्षा कारणों से मुख्यधारा के विकास और पर्यटन से काफी हद तक कट गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सरकार के प्रयासों और केंद्र सरकार के समन्वय से हालात तेजी से बदल रहे हैं। नक्सलवाद के कमजोर पड़ते ही बस्तर में शांति, विकास और पर्यटन की नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं। साय सरकार ने बस्तर में पर्यटन विकसित करने के लिए कई अहम प्रयास किए। इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है।

सरल, सहज और आदिवासी जननेता के रूप पहचान बनाने वाले विष्णुदेव साय के छत्तीसगढ़ की सत्ता संभालने के पहले प्रदेश में नक्सलवाद चरम पर था। साय सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे और बस्तर के विकास के लिए विशेष रणनीति बनाई और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ काम किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने बस्तर के लिए केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। फोर्स की तगड़ी घेराबंदी के चलते 90 फीसदी से ज्यादा नक्सली सरेंडर, गिरफ्तार और मारे जा चुके है। इस वर्ष अब तक राज्य में 189 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। गत 19 जनवरी को, 45 लाख रुपये के कुल इनाम वाले नौ नक्सलियों ने पड़ोसी गरियाबंद जिले में आत्मसमर्पण किया था। वहीं, 15 जनवरी को, राज्य के बस्तर क्षेत्र में स्थित बीजापुर जिले में कम से कम 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया जिनमें से 49 पर 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। वर्ष 2025 में राज्य में 1,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था।

सरकार के प्रयासों से पर्यटन के नक्शे पर उभरा बस्तर

Tourism and Waterfalls in Bastar: छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, जलप्रपातों और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद लंबे समय तक बस्तर पर्यटन के नक्शे पर वह स्थान नहीं बना पाया, जिसका वह हकदार था। इसका सबसे बड़ा कारण रहा—नक्सलवाद। साय सरकार से प्रयासों से शांति की वापसी ने बस्तर को पर्यटन के नक्शे पर लाने का रास्ता खोल दिया है। राज्य सरकार बस्तर में आतिथ्य और पर्यटन परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों से बस्तर में छोटे अस्पताल चलाने का आग्रह किया है। नई दिल्ली में एक इन्वेस्टर कनेक्ट समिट में निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया। बस्तर तेजी से निवेश और पर्यटन दोनों के लिए एक नया केंद्र बनकर उभर रहा है।’ बस्तर में हाल ही में हुए इन्वेस्टर समिट में राज्य सरकार ने ₹32,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित किया है।

बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और प्रमुख पर्यटन स्थल

बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम है। घने जंगल, पहाड़ियां, नदियां और झरने इस क्षेत्र को खास पहचान देते हैं। यहां स्थित चित्रकोट जलप्रपात, जो जगदलपुर से लगभग 39 किलोमीटर दूर है, अपनी विशाल जलधारा के कारण “छत्तीसगढ़ का नियाग्रा” कहलाता है। कांगेर घाटी नेशनल पार्क में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी सीढ़ीनुमा बनावट और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, धुड़मारास गांव, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा बेस्ट टूरिज्म विलेज का दर्जा मिला है, इको-टूरिज्म और होमस्टे के लिए जाना जाता है। मट्टी मरका, जिसे “बस्तर का गोवा” कहा जाता है, इंद्रावती नदी के किनारे फैली रेत और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। बस्तर में नीलम सरई, नंबी और लंका पल्ली जैसे जलप्रपात ट्रैकिंग और एडवेंचर प्रेमियों के लिए खास हैं। वहीं झारालावा जलप्रपात और आसपास का जंगल अपने रहस्यमय प्राकृतिक गुणों के लिए जाना जाता है। हांदावाड़ा (बाहुबली) जलप्रपात, मिचनार हिल टॉप, ढोलकल शिखर, इंचमपल्ली बांध और दोबे गांव (पत्थरों का परिवार) जैसे स्थल प्राकृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा संगम प्रस्तुत करते हैं।

बस्तर में पर्यटन पर सरकार का जोर

राज्य सरकार बस्तर में आतिथ्य और पर्यटन परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों से बस्तर में छोटे अस्पताल चलाने का आग्रह किया है। नई दिल्ली में एक इन्वेस्टर कनेक्ट समिट में निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘बस्तर एक उल्लेखनीय बदलाव का गवाह बन रहा है, माओवादी हिंसा में कमी आई है और सड़क तथा इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। बस्तर तेजी से निवेश और पर्यटन दोनों के लिए एक नया केंद्र बनकर उभर रहा है।’ बस्तर में हाल ही में हुए इन्वेस्टर समिट में राज्य सरकार ने ₹32,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित किया है।

छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का मजबूत आधार बन रहा बस्तर

साय सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद के खात्मे के साथ बस्तर अब डर की पहचान से बाहर निकलकर विकास, पर्यटन और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। साय सरकार ने बस्तर को विकास और पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए कई पहल शुरू की हैं। सुरक्षा बलों के समन्वय से शांति स्थापना, सड़क और अधोसंरचना परियोजनाएं, पर्यटन स्थलों का विकास, स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजनाएं इस दिशा में अहम कदम हैं। सरकार के प्रयासों से बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और शांति के साथ बस्तर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का मजबूत आधार बनने की ओर बढ़ रहा है। पहले सुरक्षा कारणों से जहां पर्यटक आने से हिचकते थे, वहीं अब प्रशासनिक सतर्कता और स्थानीय गाइड्स की मदद से यात्रा सुरक्षित हो गई है। सड़क, संचार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से दूरस्थ इलाके भी पर्यटन मानचित्र पर आ रहे हैं।

बस्तर में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं

बस्तर में इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और कल्चरल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। जंगल सफारी, ट्रैकिंग, वाटरफॉल टूरिज्म और होम-स्टे जैसे प्रयोग यहां सफल हो सकते हैं। यदि बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तो बस्तर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। पर्यटन के बढ़ने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे आदिवासी युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा। नक्सलवाद के साये से बाहर निकलता बस्तर अब उम्मीदों और संभावनाओं की नई कहानी लिख रहा है। शांति, सुरक्षा और विकास के साथ-साथ पर्यटन बस्तर की तस्वीर बदल रहा है।

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