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लद्दाख: गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरे देश में उत्सव और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। इस मौके पर लद्दाख की ऊँचाइयों और सियाचिन ग्लेशियर जैसे कठिन इलाकों में तैनात भारतीय सेना के वीर जवानों ने भी अपने साहस और देशभक्ति का अद्वितीय उदाहरण पेश किया। -20°C से भी कम तापमान में जवानों ने तिरंगा फहराकर राष्ट्र के प्रति अपने अटूट समर्पण और रक्षा का संकल्प दोहराया।
Republic Day Wishes from #Ladakh Sector.🇮🇳#RepublicDay2026 pic.twitter.com/sS06N1rxZe
— Manish Prasad (@manishindiatv) January 26, 2026
वहीं, सियाचिन, गलवान और अन्य ऊँचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों ने इस अवसर पर सिर्फ झंडा फहराया ही नहीं, बल्कि कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में चौकसी और सतर्कता भी जारी रखी। यह प्रदर्शन देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया और यह याद दिलाया कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हमारी सेना कितने कठिन हालात में भी तैनात रहती है।
सेना ने इस गणतंत्र दिवस पर जवानों के अनुशासन, साहस और समर्पण को सामने रखते हुए यह संदेश दिया कि भारत की सीमाओं की रक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सैनिकों ने कठोर ठंड और बर्फीली हवाओं के बावजूद अपनी ड्यूटी पूरी की, जिससे उनकी प्रतिबद्धता और बलिदान का प्रतीक स्पष्ट हुआ। इन क्षेत्रों में सामान्य नागरिक जीवन असंभव है, लेकिन जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी देशभक्ति का जीवंत उदाहरण पेश किया।
लद्दाख और सियाचिन के जवानों के इस प्रदर्शन से यह स्पष्ट हुआ कि गणतंत्र दिवस केवल परेड और झांकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सबसे कठिन इलाकों में तैनात जवानों के संघर्ष और समर्पण का भी प्रतीक है। जवानों की यह बहादुरी और अनुशासन देश के हर नागरिक को गर्व का अनुभव कराता है और नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाता है।
विशेष रूप से गलवान घाटी और सियाचिन ग्लेशियर जैसी क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद जवानों ने उच्चतम सतर्कता बनाए रखी। यह दिखाता है कि हमारी सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है।