विवाद शांतिपूर्वक सुलझाएं, दौलत को ‘अभिशाप’ न बनने दें : अदालत ने संजय कपूर की मां और पत्नी से कहा

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विवाद शांतिपूर्वक सुलझाएं, दौलत को ‘अभिशाप’ न बनने दें : अदालत ने संजय कपूर की मां और पत्नी से कहा

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 06:23 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 06:23 PM IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां, पत्नी और परिवार के सदस्यों से मंगलवार को कहा कि वे अपने मतभेदों को “शांतिपूर्वक” सुलझाएं और ईश्वर से मिले दौलत के “आशीर्वाद” को “अभिशाप” में न बदलने दें।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने स्थिति को “दुखद” करार दिया। उन्होंने कहा कि संपत्ति को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे परिवार के सदस्य शोक में हैं और उन्हें एक-दूसरे के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के प्रयास करने चाहिए।

न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने संजय की मां रानी कपूर, पत्नी प्रिया कपूर और बहन मंदिरा कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं से साथ बैठकर मुद्दों को इस तरह से सुलझाने के लिए कहा, जिससे सभी पक्षों के हितों की रक्षा हो सके।

न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने कहा, “क्या मध्यस्थता की कोई गुंजाइश है? अदालत में आपकी निजी बातें सार्वजनिक हो रही हैं। ईश्वर ने आपको दौलत से नवाजा है।”

उन्होंने कहा, “आप सभी को रिश्तों का सम्मान करने की कोशिश करनी चाहिए… आगे बढ़ने का रास्ता शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालना है। आशीर्वाद को अभिशाप नहीं बनने देना चाहिए। दोनों पक्षों को प्रयास करने होंगे।”

उच्च न्यायालय ने संजय की मां की ओर से प्रिया कपूर और अन्य के खिलाफ दाखिल उस याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्होंने अपने कथित पारिवारिक ट्रस्ट को “अमान्य” घोषित करने का अनुरोध किया है।

याचिका में 80 वर्षीय रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर बनाया गया ट्रस्ट “जाली, फर्जी और धोखाधड़ी वाले” दस्तावेजों पर आधारित था तथा उन्हें उनके सभी अधिकारों, संपत्तियों एवं विरासत से गलत तरीके से वंचित कर दिया गया है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने कहा कि बहू को यह देखना चाहिए कि वादी के पति ने ही “सब कुछ स्थापित किया” था और उनकी मेहनत का फल सभी को मिलना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने मुकदमे को खारिज करने के अनुरोध वाली प्रिया की याचिका पर रानी को नोटिस जारी किया। रानी के वकील ने अपनी मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों‍ का खंडन किया।

उच्च न्यायालय ने प्रिया को कंपनी के लाभांश के वितरण पर रोक लगाने और संपत्ति को सुरक्षित रखने के अनुरोध वाली रानी की अर्जी पर प्रिया और अन्य प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किए।

अर्जी में रानी ने प्रतिवादियों (बहू प्रिया, पोते-पोतियों और अन्य) को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ का किसी भी तरह से इस्तेमाल करने या उसके प्रबंधन एवं कामकाज में शामिल होने से स्थायी तौर पर रोकने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

रानी ने दावा किया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी हैं, जो ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ सहित विभिन्न व्यवसायों के प्रवर्तक थे और जब संपत्तियों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ में स्थानांतरित किया गया, तो उनके साथ “सुनियोजित धोखाधड़ी” की गई।

अर्जी में दावा किया गया है कि संजय ने अपनी मौत तक रानी कपूर को कभी यह पुष्टि नहीं की कि वास्तव में उन्हें उनके सभी अधिकारों, संपत्तियों और विरासत से वंचित कर दिया गया है और न ही उन्हें कथित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ की एक प्रति प्रदान की।

अर्जी में आरोप लगाया गया है, “प्रतिवादी संख्या 1 से 9 (प्रिया और अन्य) की ओर से वादी (रानी) के दिवंगत बेटे संजय कपूर के साथ दुर्भाग्यपूर्ण मिलीभगत से किए गए अवैध लेन-देन के एक जटिल जाल के जरिये वादी की सभी संपत्तियां उनकी जानकारी के बिना ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ नामक एक धोखाधड़ी पर आधारित ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गईं।”

संजय का पिछले साल 12 जून को लंदन में एक पोलो मैच के दौरान कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

संजय की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों ने अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। उन्होंने प्रिया पर “लालची” होने का आरोप लगाया है।

मामले में अगली सुनवाई मार्च में होगी।

भाषा पारुल नरेश

नरेश