राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पद के आवेदकों में सेवानिवृत्त नौकरशाह सबसे आगे

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पद के आवेदकों में सेवानिवृत्त नौकरशाह सबसे आगे

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पद के आवेदकों में सेवानिवृत्त नौकरशाह सबसे आगे
Modified Date: July 17, 2026 / 11:07 pm IST
Published Date: July 17, 2026 11:07 pm IST

अयोध्या (उप्र), 17 जुलाई (भाषा) अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद के लिए आवेदन करने वालों में सेवानिवृत्त नौकरशाह सबसे आगे हैं।

चयन प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शनिवार को समाप्त हो जाएगी। यह चयन प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद इसे शुरू किया गया है। ट्रस्ट ने वित्तीय निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने, संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने तथा मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को सुचारु बनाने के उद्देश्य से व्यापक प्रशासनिक बदलाव के तहत सीईओ का पद सृजित किया है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। कई आवेदकों ने अपने ‘बायोडेटा’ सीधे हमें भेजे, लेकिन हमने उन्हें यह कहते हुए वापस कर दिया कि वे इन्हें विशेषज्ञ समिति को भेजें। आवेदनों की समीक्षा कर ट्रस्ट को नामों की सिफारिश करने का अधिकार केवल इसी समिति को है।’’

चयन प्रक्रिया से परिचित एक सूत्र के मुताबिक, तीन सदस्यीय समिति का काम केवल आवेदनों की जांच करना और अभ्यर्थियों की संक्षिप्त सूची तैयार करना है, जबकि अंतिम नियुक्ति का फैसला पूरी तरह ट्रस्ट करेगा।

सूत्र ने कहा, ‘‘समिति आवेदनों का आकलन करेगी और योग्य अभ्यर्थियों के नामों की सिफारिश करेगी। अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट करेगा।’’ उन्होंने कहा कि समिति के तीन से अधिक नाम भेजने की संभावना नहीं है।

इस महीने की शुरुआत में घोषित विशेषज्ञ समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं।

आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि शनिवार शाम चार बजे है, जिसके बाद समिति आवेदनों की जांच शुरू करेगी। समिति को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए अंतिम तिथि से करीब एक महीने का समय दिया गया है।

योग्यता और अनुभव की जांच के अलावा समिति अपनी सिफारिशें देने से पहले संक्षिप्त सूची में शामिल अभ्यर्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर सकती है।

सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट अपना पहला सीईओ चुनने से पहले संक्षिप्त सूची में शामिल अभ्यर्थियों से अलग से बातचीत कर सकता है। ट्रस्ट में रिक्त पद भरे जाने के बाद यह नियुक्ति होने की उम्मीद है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाए जाने के बाद ट्रस्ट में अभी 13 सदस्य हैं। न्यासी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का पिछले साल निधन हो गया था। सूत्रों ने बताया कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में रिक्त पदों को भरा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया ट्रस्ट द्वारा स्वतंत्र रूप से संचालित की जा रही है। ट्रस्ट उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत काम करता है और उस पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।

ट्रस्ट ने 13 जुलाई को नए पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। अधिसूचना में कहा गया था कि अभ्यर्थियों की आयु 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उनके पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, संस्था, सरकारी विभाग या कंपनी में कम से कम 20 वर्ष का प्रबंधन अनुभव होना चाहिए और उन्हें ‘‘सक्रिय हिंदू’’ होना चाहिए तथा वैष्णव परंपरा से जुड़े भगवान राम के भक्तों को प्राथमिकता दी जाएगी।

आवेदक के पास कम से कम स्नातक की डिग्री होनी चाहिए और उसे हिंदी तथा अंग्रेजी का ज्ञान होना चाहिए। इसके अलावा, उसे प्रशासन, वित्त, लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और कानूनी मामलों का अनुभव होना चाहिए।

सीईओ के रूप में काम कर चुके या किसी मंदिर अथवा हिंदू धार्मिक संस्थान का प्रबंधन कर चुके अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सेवा के अंतिम दो वर्षों में कार्यरत सरकारी अधिकारी, सेवानिवृत्त अधिकारी और निजी क्षेत्र के पात्र पेशेवर भी आवेदन कर सकते हैं।

अधिसूचना के मुताबिक, सीईओ ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेंगे और शुरुआत में उन्हें तीन साल के अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा। संतोषजनक कार्य निष्पादन के आधार पर अनुबंध की अवधि बढ़ाई जा सकेगी। वेतन और सेवा की शर्तें आपसी बातचीत से तय की जाएंगी।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पहले कहा था कि सीईओ की मुख्य जिम्मेदारी ‘‘ट्रस्ट में भक्तों का विश्वास बनाए रखना’’ होगी। इसके साथ ही वह मंदिर के वित्तीय प्रबंधन की निगरानी करेगा और तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करेगा।

भाषा मनीष आनन्द सिम्मी

सिम्मी


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