शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल, संगठन का कब्जा न हो: राहुल गांधी

शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल, संगठन का कब्जा न हो: राहुल गांधी

शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल, संगठन का कब्जा न हो: राहुल गांधी
Modified Date: July 17, 2026 / 10:54 pm IST
Published Date: July 17, 2026 10:54 pm IST

(तस्वीरों के साथ जारी)

देहरादून, 17 जुलाई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए शुक्रवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए।

राहुल गांधी ने प्रश्नपत्र लीक की समस्या को दूर करने के लिए देश में ‘‘राजनीतिक सहमति’’ बनाने की वकालत की।

गांधी ने भारी बारिश के बाद यहां बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर छात्रों से संवाद करते हुए कहा, ‘‘हमारे शैक्षणिक संस्थान स्वतंत्र होने चाहिए। संस्थानों पर किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए। कुलपति किसी एक संगठन के नहीं होने चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के प्रभारी भी किसी एक राजनीतिक संगठन के नहीं होने चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या को जड़ से खत्म किया जाना चाहिए और इसके लिए देश में ‘‘राजनीतिक सहमति’’ बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्ष में प्रश्नपत्रों के लीक होने के कारण 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है लेकिन किसी भी मामले में न तो दोषसिद्धि हुई और न ही किसी को सजा मिली।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 साल में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए, यानी औसतन हर महीने एक से अधिक प्रश्नपत्र लीक हुआ लेकिन दोषसिद्धि की दर शून्य है और किसी को सजा नहीं मिली।’’

गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या ‘हिमखंड’ की तरह है जिसका केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही दिखाई देता है, जबकि बाकी मामलों का पता ही नहीं चल पाता।

उन्होंने कहा कि देश में छात्रों के साथ कई तरह के अन्याय हो रहे हैं, जिनमें सबसे गंभीर समस्या प्रश्नपत्र लीक की है।

प्रश्नपत्र लीक को देश का एक प्रमुख मुद्दा बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसा होना छात्रों और उनके माता-पिता का अपमान है। उन्होंने इस संदर्भ में नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं का भी जिक्र किया।

गांधी ने एक अन्य आंकड़े का उल्लेख करते हुए कहा कि नौ करोड़ अभ्यर्थियों में से केवल छह लाख को सफलता मिलती है, यानी 150 अभ्यर्थियों में से केवल एक युवा सफल हो पाता है।

गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने से न केवल युवाओं की मेहनत बर्बाद होती है, बल्कि उनके माता-पिता की उम्मीदें भी टूट जाती हैं।

उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत परिवार मध्यम वर्ग या गरीब तबके से आते हैं, जबकि एक बच्चे की शिक्षा पर करीब नौ लाख रुपये खर्च होते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती हैं, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल कर और प्रश्नपत्रों का यादृच्छिकीकरण (रैंडमाइजेशन) करके इन्हें एक दिन के बजाय कई दिनों में कराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में लचीलापन होना चाहिए और तकनीक तथा यादृच्छिकीकरण के जरिये प्रश्नपत्र लीक की समस्या को दूर किया जा सकता है।

गांधी ने कहा, ‘‘परीक्षा आयोजित करना सरकार का काम है। यह काम निजी कंपनियों को नहीं दिया जा सकता क्योंकि उनका उद्देश्य पैसा बटोरना होता है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने पर इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिन माता-पिता के बच्चों ने प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या की, सरकार ने उन्हें एक संदेश या चिट्ठी तक नहीं भेजी और न ही खेद प्रकट किया।

गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की स्थिति में छात्रों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए, दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए और उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ये हमारे सुझाव हैं, जिन्हें आसानी से लागू किया जा सकता है। हम चाहते हैं कि इन्हें देश में जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि हमारी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था निष्पक्ष बन सके।’’

गांधी के कार्यक्रम में हाल में देहरादून में आत्महत्या करने वाली 23 वर्षीय नीट अभ्यर्थी रिया कुमारी के पिता भी पहुंचे। उन्होंने रुंधे गले से अपनी बेटी को याद करते हुए कहा कि ऐसी नाइंसाफी किसी अन्य बच्चे के साथ नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी बेटी बहुत मेहनती थी और रात दो-तीन बजे तक पढ़ती थी। नीट का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद से वह परेशान थी। मैंने उससे कहा था कि ज्यादा तनाव मत लो।’’

उन्होंने अफसोस जताया कि उनकी बेटी की मौत के बाद ‘‘सरकार ने उसके लिए श्रद्धांजलि का संदेश तक नहीं भेजा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस्तीफा मत दो, श्रद्धांजलि तो दे दो।’’

गांधी ने भावुक माहौल के बीच रिया के पिता को गले लगाकर सांत्वना दी।

कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक मौजूद थे। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे चार अभ्यर्थी भी मंच पर आए और उन्होंने परीक्षाओं की तैयारी में की गई मेहनत तथा प्रश्नपत्र लीक होने के बाद की मनोदशा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

भाषा दीप्ति सिम्मी

सिम्मी


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