नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी बच्चे के शिक्षा के अधिकार में उसके लिए किसी विशेष स्कूल का चयन करने का अधिकार शामिल नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम एक लाभकारी कानून है, जिसे सामाजिक समावेश के उद्देश्यों को प्राप्त करने और यह सुनिश्चित करने के लिए अधिनियमित किया गया है कि स्कूल एक साझा स्थान बनें जो जाति, जातीय समूह या जातिगत रेखाओं की बाधाओं से अलग न हो।
अदालत ने 25 मार्च को फैसला सुनाया, ‘‘हालांकि, शिक्षा के ऐसे अधिकार को किसी विशेष स्कूल को चुनने के अधिकार में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।’’
अदालत का फैसला एक मां की अपील पर आया है, जिसमें उन्होंने अपने बच्चे को शैक्षणिक सत्र 2024-2025 के लिए एक निजी स्कूल में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत कक्षा दो में प्रवेश दिये जाने का अनुरोध किया था।
अपीलकर्ता ने इससे पहले उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ से अपने बच्चे को 2023-2024 शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूल की कक्षा एक में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत प्रवेश दिलाने के लिए याचिका दायर की थी।
हालांकि, एकल न्यायाधीश ने कहा था कि शैक्षणिक वर्ष के लिए कक्षा एक में खाली रह गई ईडब्ल्यूएस सीटें अगले वर्ष उसी कक्षा के लिए आगे बढ़ा दी जाएंगी और अपीलकर्ता के वार्ड सहित किसी भी ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार के लिए उपलब्ध होंगी, यदि वे आवेदन करना चाहें।
अपीलकर्ता ने हालांकि खंडपीठ के समक्ष यह तर्क दिया कि उसके बच्चे को शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए विद्यालय में कक्षा दो में दाखिला दिया जाना चाहिए।
अपील में राहत देने से इनकार करते हुए, खंडपीठ ने कहा कि याचिका लंबित रहने के दौरान अनंतिम प्रवेश या सीट आरक्षित करने के किसी भी अंतरिम आदेश के अभाव में, शैक्षणिक वर्ष समाप्त होने के बाद छात्र को स्कूल में प्रवेश दिए जाने का अधिकार समाप्त हो जाएगा।
इसने कहा कि जब स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया, तो शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने अपीलकर्ता के बच्चे को एक अन्य स्कूल में दाखिला दिला दिया, जो कि अपीलकर्ता द्वारा आवेदन पत्र दाखिल करते समय चुने गए पसंदीदा स्कूलों में से एक था।
अदालत ने हालांकि गौर किया कि अपीलकर्ता ने दूसरे स्कूल को स्वीकार नहीं किया।
अपीलकर्ता ने कहा कि मार्च 2023 में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘ड्रा’में, उसके बच्चे का नाम निजी स्कूल में प्रवेश के लिए चुना गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह दस्तावेजों के सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्कूल पहुंची, तो उसे दाखिला देने से वंचित कर दिया गया और बताया गया कि उसे आगे की जानकारी दी जाएगी।
अदालत को बताया गया कि इसके बाद अपीलकर्ता को सूचित किया गया कि सामान्य श्रेणी की सभी सीट भर जाने तक ईडब्ल्यूएस बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा सकता है, और इसलिए उसके बच्चे को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया।
अपीलकर्ता ने कहा कि इसलिए उन्होंने रिट याचिका दायर कर स्कूल को निर्देश देने का अनुरोध किया कि वह शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘ड्रा’ के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों की सूची के अनुसार प्रवेश प्रदान करे।
अपील की सुनवाई के दौरान, शिक्षा विभाग के वकील ने अपीलकर्ता के बच्चे को नगर निगम के किसी भी स्कूल में दाखिला दिलाने की पेशकश की।
अपीलकर्ता के वकील ने हालांकि प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता आवंटित विद्यालय के अलावा किसी अन्य संस्थान में दाखिला लेने को तैयार नहीं थी क्योंकि उनके बच्चे को दाखिले से वंचित कर दिया गया था जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी।
भाषा देवेंद्र माधव
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