नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के चिकित्सकों ने 31 वर्षीय महिला के हृदय का न्यूनतम चीर-फाड़ वाला ऑपरेशन किया है जो ऐसी दुर्लभ स्थिति से पीड़ित है जिसमें उसके आंतरिक अंग सामान्य स्थिति के ठीक उलट यानी दर्पण-प्रतिबिंब की तरह व्यवस्थित हैं। अस्पताल ने दावा किया कि दुनिया में पहली बार इस तरह का सफल ऑपरेशन किया गया है।
अस्पताल ने बताया कि राजस्थान की यह मरीज जन्मजात विकार ‘साइटस इनवर्सस’ से पीड़ित है और उसके आंतरिक अंग सामान्य स्थिति से पूरी तरह विपरीत स्थिति में हैं यानी उसका हृदय दाईं ओर, यकृत बाईं ओर, तिल्ली दाईं ओर और आमाशय दाईं ओर है।
जांच में यह भी पाया गया कि वह जन्मजात हृदय रोग- आंशिक ‘एट्रियोवेंट्रिकुलर’ (एवी) नलिका दोष से पीड़ित थी जिसमें हृदय में छेद होने के कारण शुद्ध और अशुद्ध रक्त आपस में मिल जाता है।
आरएमएल अस्पताल के हृदय-वक्ष एवं रक्तवाहिका शल्यक्रिया (सीटीवीएस) विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर एवं निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया ने कहा, ‘‘ ‘साइटस इनवर्सस’ अपने आप में अत्यंत दुर्लभ स्थिति है। इससे अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित नहीं होती, बस वे सामान्य स्थान पर नहीं होते। ‘साइटस इनवर्सस’ के साथ आंशिक एवी नलिका दोष होने से यह मामला और भी दुर्लभ हो जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘छाती की हड्डी काटे बिना छोटा चीरा लगाकर ऑपरेशन किए जाने का यह दुनिया में पहला मामला है।’’
यह ऑपरेशन 30 मार्च को किया गया और इसे सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया गया। मरीज को शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
भाषा सिम्मी माधव
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