मरीजों के साथ ‘दिन-दहाड़े डकैती’ : कैंसर की जरूरी दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर न्यायालय ने हैरानी जताई

Ads

मरीजों के साथ ‘दिन-दहाड़े डकैती’ : कैंसर की जरूरी दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर न्यायालय ने हैरानी जताई

  •  
  • Publish Date - September 22, 2026 / 08:14 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 08:14 PM IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कैंसर की जरूरी दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर मंगलवार को हैरानी जताते हुए इसे मरीजों के साथ “दिन-दहाड़े डकैती” करार दिया।

शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर किया कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक दवा का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 27,000 रुपये रखा गया था, जबकि खुदरा विक्रेताओं को यह 2,700 रुपये में उपलब्ध कराई गई थी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, “यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि जिन अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं।”

पीठ दवाओं की कीमतों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करने सहित औषधियों से जुड़े अन्य मुद्दे उठाने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

उसने इस बात को “बेहद चौंकाने वाला” बताया कि कैंसर की एक जरूरी दवा पर 27,000 रुपये की एमआरपी छपी थी, जबकि खुदरा विक्रेता के लिए इसकी कीमत (पीटीआर) 2,700 रुपये थी।

पीठ ने कहा, “(दवा की) एमआरपी उस दर से 10 गुना अधिक है, जिस पर इसे खुदरा विक्रेताओं को उपलब्ध कराया जाता है। अगर यह जबरन वसूली नहीं है, तो फिर क्या है? लोग इलाज के लिए अपने मकान और गहने तक बेच देते हैं।”

उसने कहा, “कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाओं पर ₹27,000 रुपये की एमआरपी छपी है, जबकि इनकी पीटीआर ₹2,700 रुपये है। यह पूरी तरह से लूट-खसोट है। यह मरीजों के साथ दिन-दहाड़े डकैती है।”

पीठ ने सवाल किया कि मरीजों को इस तरह कैसे ठगा जा सकता है।

उसने कहा, “यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि जिन अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं।”

एक याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि उसकी याचिका में पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों के जेनेरिक दवाएं न लिखे जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। उसने कहा कि दवाओं की एमआरपी तय करना बेहद अहम मुद्दा है।

एक याचिका के सिलसिले में केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि सरकार इस मामले को विरोधी पक्षों के बीच मुकदमेबाजी के तौर पर नहीं देख रही है।

पीठ ने माना कि कीमत तय करना एक अहम मुद्दा है। उसने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की।

एक याचिका में शीर्ष अदालत से अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे दवा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं की ओर से जरूरी दवाओं की कथित अनुचित मूल्य वृद्धि को रोककर दवा उत्पादों को अधिक किफायती बनाएं।

इसमें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत कीमतों पर सख्ती से नियंत्रण सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है, ताकि दवा आपूर्ति शृंखला में कीमत तय करने की व्यवस्था का उल्लंघन न हो और खुदरा विक्रेता अनुचित व्यापार प्रथाओं के जरिये अत्यधिक मुनाफा न कमा सकें।

दूसरी याचिका में उन चिकित्सकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जो मरीजों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं।

भाषा पारुल नरेश

नरेश

ताजा खबर